मुख्य तथ्य
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि 2024 में गर्मी के दिनों में ओजोन प्रदूषण के कारण लगभग 26,500 मौतें हुईं, जिनमें से 830 मौतें विशेष रूप से हीटवेव के कारण अतिरिक्त थीं। यह अध्ययन नेचर पोर्टफोलियो जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
विस्तृत जानकारी
सतही ओजोन एक हानिकारक प्रदूषक है जो हृदय और फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह गर्मी के दौरान अन्य प्रदूषकों से सूर्य के प्रकाश में बनता है। अध्ययन में पाया गया कि उत्तर भारत में ओजोन का स्तर 85-110 μg/m³ तक पहुंच गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की 70 μg/m³ की सीमा से अधिक है। पश्चिमी हिमालय में 2024 में यह सीमा 115% तक पार हो गई।
प्रभाव
अध्ययन में 2004 से 2024 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें 188 हीटवेव घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 2010, 2016, 2019 और 2024 सबसे गंभीर थे। लेखकों ने कहा कि 'गर्मी-ओजोन चरम सीमाएं तीव्र हो रही हैं, जिसके लिए तत्काल एकीकृत जलवायु-वायु गुणवत्ता नीति कार्रवाई की आवश्यकता है।'
पाठकों के लिए सुझाव
- गर्मी के दिनों में बाहर जाने से बचें, खासकर दोपहर में।
- एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।
- स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों पर ध्यान दें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गर्मी में ओजोन प्रदूषण से कितनी मौतें हुईं?
अध्ययन के अनुसार, 2024 में गर्मी के दिनों में लगभग 26,500 मौतें ओजोन प्रदूषण से जुड़ी हैं।
उत्तर भारत में ओजोन का स्तर कितना था?
उत्तर भारत में ओजोन का स्तर 85-110 μg/m³ तक पहुंच गया, जो WHO की सीमा से अधिक है।
क्या यह अध्ययन पहली बार है?
हां, यह भारत में गर्मी के दौरान ओजोन का पहला व्यापक देशव्यापी आकलन है।