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हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के खिलाफ बड़ा आंदोलन, 21 जुलाई से प्रदर्शन शुरू

मुख्य तथ्य हरियाणा सरकार द्वारा प्रस्तावित बिजली वितरण सुधारों के खिलाफ कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता संगठनों ने संयुक्त मोर्चा बनाकर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। इस आंदोलन की शुरुआत 21 जुलाई को…

मुख्य तथ्य

हरियाणा सरकार द्वारा प्रस्तावित बिजली वितरण सुधारों के खिलाफ कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता संगठनों ने संयुक्त मोर्चा बनाकर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। इस आंदोलन की शुरुआत 21 जुलाई को नूंह और 22 जुलाई को गुरुग्राम में सामूहिक प्रदर्शनों से होगी।

प्रस्तावित सुधार और विरोध के कारण

हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में एक निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने, कृषि के लिए अलग डिस्कॉम (एग्री डिस्कॉम) बनाने और पूरे राज्य में स्मार्ट मीटरिंग लागू करने का प्रस्ताव रखा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ये कदम सार्वजनिक बिजली वितरण तंत्र को निजी हाथों में सौंपने की साजिश है।

रोहतक में कर्मचारी भवन में हुई बैठक में 'हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं उपभोक्ता संघर्ष मंच' का गठन किया गया। बैठक की अध्यक्षता ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश राठी, एचएसईबी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष अनिल कौशिक और हरियाणा पावर कॉरपोरेशन एससी/एसटी एंड बीसी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र सिंह बराड़ ने की।

कर्मचारी नेताओं का रुख

इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि ये प्रस्ताव 'जनविरोधी और कर्मचारी विरोधी' हैं। उन्होंने इनके खिलाफ व्यापक लोकतांत्रिक संघर्ष का आह्वान किया।

ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि राज्य का बिजली वितरण नेटवर्क 8,000 से अधिक कर्मचारियों की मेहनत से बना है और इसे किसी भी हालत में निजी कंपनियों को नहीं सौंपा जाएगा।

किसान संगठनों का समर्थन

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता इंद्रजीत सिंह और रतन सिंह मान ने भी विरोध में आवाज उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने 8 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान अपने समर्थन में कुछ उपभोक्ताओं को जुटाया, जबकि लाखों हितधारकों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

किसान नेताओं का कहना है कि एग्री डिस्कॉम बनाने से कृषि बिजली सब्सिडी तंत्र कमजोर होगा। उन्होंने बताया कि हरियाणा बिजली वितरण निगम ने भी इस प्रस्ताव पर कानूनी और तकनीकी आपत्तियां उठाई थीं, लेकिन हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने आपत्तियों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है, जो 15 दिनों में रिपोर्ट देगी।

आगे की रणनीति

संघर्ष मंच के नेताओं ने कहा कि आने वाले हफ्तों में आंदोलन को तेज किया जाएगा ताकि सरकार और नियामक पर इन प्रस्तावों को वापस लेने का दबाव बनाया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हरियाणा में बिजली वितरण निजीकरण का विरोध क्यों हो रहा है?

सरकार द्वारा गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस, अलग एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग लागू करने के प्रस्ताव को कर्मचारी और उपभोक्ता संगठन 'जनविरोधी और कर्मचारी विरोधी' बता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे सार्वजनिक वितरण तंत्र कमजोर होगा और निजी कंपनियों को फायदा होगा।

आंदोलन की अगली तारीखें क्या हैं?

21 जुलाई को नूंह और 22 जुलाई को गुरुग्राम में सामूहिक प्रदर्शन होंगे। इसके बाद 8 अगस्त तक सभी जिलों में विरोध कार्यक्रम चलेंगे।

किन संगठनों ने इस आंदोलन की शुरुआत की है?

ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर्स यूनियन, एचएसईबी वर्कर्स यूनियन, हरियाणा पावर कॉरपोरेशन एससी/एसटी एंड बीसी यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा सहित कई संगठनों ने 'हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं उपभोक्ता संघर्ष मंच' बनाया है।

एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग पर क्या आपत्ति है?

किसान नेताओं का कहना है कि एग्री डिस्कॉम से कृषि बिजली सब्सिडी तंत्र कमजोर होगा। स्मार्ट मीटरिंग से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और यह निजीकरण की ओर कदम है।

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