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गुजरात की मांजलपुर सीट: योगेश पटेल के निधन के बाद कौन होगा उत्तराधिकारी?

मांजलपुर उपचुनाव: योगेश पटेल के बिना पहली बार 2008 के परिसीमन के बाद से वडोदरा में मांजलपुर विधानसभा सीट पर पहली बार 30 जुलाई के उपचुनाव में योगेश पटेल का नाम नहीं होगा। भाजपा के…

मांजलपुर उपचुनाव: योगेश पटेल के बिना पहली बार

2008 के परिसीमन के बाद से वडोदरा में मांजलपुर विधानसभा सीट पर पहली बार 30 जुलाई के उपचुनाव में योगेश पटेल का नाम नहीं होगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता पटेल ने इस सीट से तीन बार और पूर्व में रावपुरा से पांच बार चुनाव जीता था। 2 जून को उनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई, जिससे भाजपा के सामने सवाल है कि योगेश पटेल का उत्तराधिकारी कौन होगा?

भाजपा के लिए चुनौती

भाजपा के लिए यह उपचुनाव सिर्फ सीट बचाने का नहीं, बल्कि पार्टी की एकता बनाए रखने का भी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 75 वर्ष से अधिक उम्र के उम्मीदवारों को टिकट न देने की अपनी अनलिखित नीति को तोड़ते हुए 77 वर्षीय पटेल को फिर से मैदान में उतारा था। उनका नाम 182 उम्मीदवारों की सूची में सबसे अंत में था, जो पार्टी के भीतर मंथन को दर्शाता है। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने इस पर सवालों को टाल दिया था। पटेल का जनाधार इतना मजबूत था कि 2022 में उन्होंने एक लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की।

योगेश पटेल का राजनीतिक सफर

पटेल ने अपनी राजनीतिक यात्रा 1970 के दशक में कांग्रेस से शुरू की, फिर 1980 के दशक में संजय विचार मंच में शामिल हुए, 1990 में जनता दल से पहली बार चुनाव जीता और 1995 में भाजपा में आए। वे शिवभक्त थे और वडोदरा की प्रसिद्ध शिवरात्रि यात्रा के आयोजक थे। उन्होंने सूरसागर झील में 111 फीट की शिव प्रतिमा पर सोने का लेप चढ़ाने की परियोजना को आगे बढ़ाया, जो अधूरी है। उनके निधन के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने श्रद्धांजलि दी थी, जिनसे उनके घनिष्ठ संबंध थे।

जातीय समीकरण और दावेदार

मांजलपुर में ओबीसी सबसे बड़ा वोट बैंक है, उसके बाद पाटीदार, ब्राह्मण, वाणी और मराठी समुदाय हैं। योगेश पटेल ल्यूवा पाटीदार समुदाय से थे, लेकिन उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता जातिगत समीकरणों को पार कर गई थी। अब पाटीदार उत्तराधिकारी की मांग और ओबीसी या अन्य उच्च जाति के दावेदारों के बीच टकराव की संभावना है। एक वरिष्ठ भाजपा नेता के अनुसार, "योगेश काका के जाने के बाद गुटबाजी संभालना मुश्किल हो गया है।" वडोदरा शहर भाजपा अध्यक्ष जयप्रकाश सोनी, वरिष्ठ नेता स्मृति भावे और पूर्व शहर अध्यक्ष विजय शाह को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।

कांग्रेस को मौका?

कांग्रेस को दो दशकों में पहली बार मांजलपुर में मुकाबले की उम्मीद है। भाजपा की मजबूत संगठनात्मक मशीनरी के बावजूद, पटेल की अनुपस्थिति में कांग्रेस को अवसर दिख रहा है। हाल ही में निगम चुनावों में भाजपा के "नो रिपीट कैंडिडेट" प्रयोग से कुछ नाराजगी भी है, जिससे गुटीय तनाव बढ़ा है।

FAQ

मांजलपुर उपचुनाव कब होगा?

30 जुलाई को उपचुनाव होगा, नामांकन की अंतिम तिथि 13 जुलाई है।

योगेश पटेल कौन थे?

भाजपा के वरिष्ठ नेता, आठ बार विधायक, 2 जून 2022 को निधन।

उत्तराधिकारी के लिए मुख्य दावेदार कौन हैं?

जयप्रकाश सोनी, स्मृति भावे और विजय शाह प्रमुख दावेदार हैं।

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