प्रमुख तथ्य
नेयवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड (NUPPL) ने घाटमपुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट (GTPP) की तीसरी इकाई (660 मेगावाट) का वाणिज्यिक संचालन (COD) 13 जून 2026 से प्रभावी घोषित कर दिया है। इसके साथ ही 1980 मेगावाट (3x660 मेगावाट) की पूरी परियोजना अब पूरी तरह से चालू हो गई है।
परियोजना का विवरण
यह परियोजना NLC इंडिया लिमिटेड (NLCIL) और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड का संयुक्त उद्यम है। तीसरी इकाई को 3 अप्रैल 2026 को ग्रिड से सफलतापूर्वक जोड़ा गया, 22 अप्रैल को पहली कोयला फायरिंग हुई और 6 मई को पूर्ण लोड संचालन प्राप्त हुआ। 72 घंटे का पूर्ण-लोड परीक्षण 13 जून को सफलतापूर्वक पूरा हुआ, जिसके बाद वाणिज्यिक संचालन की घोषणा की गई।
प्रभाव और लाभ
तीनों इकाइयों के चालू होने से यह थर्मल स्टेशन प्रतिवर्ष 14,743 मिलियन यूनिट बिजली उत्पन्न करेगा, जो लगभग 1.2 करोड़ भारतीय परिवारों की वार्षिक ऊर्जा आवश्यकता को पूरा कर सकता है। इससे परियोजना का वार्षिक राजस्व 8,453 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के आवंटन के अनुसार, 93.11% बिजली उत्तर प्रदेश को जाएगी, जबकि शेष अन्य राज्यों को आवंटित की गई है।
पर्यावरणीय पहलू
परियोजना में सुपरक्रिटिकल बॉयलर, फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD), सलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन (SCR) और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है, जो सख्त पर्यावरणीय मानकों को पूरा करती हैं।
रोजगार और आर्थिक लाभ
तीनों इकाइयों के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 25,000 रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है, जिससे उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों को आर्थिक लाभ होगा।
कोयला आपूर्ति सुनिश्चित
NUPPL झारखंड के दुमका जिले में पचवारा साउथ ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (PSOCP) विकसित कर रहा है, जो संयंत्र के लिए स्थायी ईंधन स्रोत प्रदान करेगा। खनन कार्य 19 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ और 29 मार्च 2026 को कोयला एक्सपोजर प्राप्त हुआ। वाणिज्यिक कोयला उत्पादन वित्त वर्ष 2026-27 से चरणबद्ध तरीके से शुरू होने की उम्मीद है।
FAQ
Ghatampur Thermal Power Project की कुल क्षमता कितनी है?
Ghatampur Thermal Power Project की कुल स्थापित क्षमता 1980 मेगावाट है, जो तीन यूनिटों (प्रत्येक 660 मेगावाट) से मिलकर बनी है।
इस परियोजना से कितनी बिजली उत्तर प्रदेश को मिलेगी?
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के आवंटन के अनुसार, इस परियोजना से उत्पन्न बिजली का 93.11% हिस्सा उत्तर प्रदेश को आवंटित किया गया है।
इस परियोजना से कितने रोजगार के अवसर पैदा होंगे?
तीनों यूनिटों के चालू होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 25,000 रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या उपाय किए गए हैं?
परियोजना में सुपरक्रिटिकल बॉयलर, फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD), सलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन (SCR) और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया है ताकि सख्त पर्यावरणीय मानकों का पालन हो सके।
स्रोत: www.thehindu.com