मुख्य तथ्य
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को ऑनलाइन गेमिंग कंपनी Gameskraft के संस्थापकों दीपक सिंह, विकास तनेजा और पृथ्वीराज सिंह की प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर दिया। कोर्ट ने उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
विस्तृत जानकारी
न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने कहा कि गिरफ्तारियां कानून के विपरीत थीं। उन्होंने आदेश दिया, “याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं। इन याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी कानून के विपरीत घोषित की जाती है। परिणामस्वरूप, याचिकाकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए।” कोर्ट ने 8 जून को आदेश सुरक्षित रख लिया था।
पृष्ठभूमि
यह मामला तीन प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) से संबंधित है, जो तेलंगाना में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) पर आधारित थीं। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को Gameskraft के खिलाफ पिछली मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर रोक लगा दी थी, क्योंकि बेंगलुरु FIR में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी गई थी। इसके दो दिन बाद तेलंगाना में एक नई FIR दर्ज हुई, जिसमें दावा किया गया कि एक खिलाड़ी को ऑनलाइन रम्मी प्लेटफॉर्म पर नुकसान हुआ। इसके बाद ED ने तेलंगाना मामलों के आधार पर नई ECIR दर्ज की और 7 मई को संस्थापकों को गिरफ्तार कर लिया।
दोनों पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ED ने वही सामग्री इस्तेमाल की जो पहले की ECIR में थी। ED ने कहा कि जांच में नई सामग्री मिली है। ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने तर्क दिया कि 187 करोड़ रुपये की अपराध आय Gameskraft के माध्यम से डायवर्ट की गई और संबद्ध संस्थाओं ने 100 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश किया। उन्होंने कहा कि आगे की जांच के लिए अभियुक्तों की हिरासत जरूरी है। वहीं, दीपक सिंह के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता एस मुरलीधर ने तर्क दिया कि ED ने PMLA की धारा 19 का पालन नहीं किया और गिरफ्तारी के आधार पर पहले से मौजूद सामग्री का इस्तेमाल किया।
प्रभाव और आगे की राह
हाईकोर्ट का विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है। इस फैसले से Gameskraft को बड़ी राहत मिली है, हालांकि मामले की जांच जारी रहेगी।
FAQ
- कर्नाटक हाईकोर्ट ने किस आधार पर Gameskraft के संस्थापकों की गिरफ्तारी को अवैध ठहराया? कोर्ट ने पाया कि ED ने बिना नई सामग्री के गिरफ्तारी की और PMLA की धारा 19 का पालन नहीं किया।
- ED ने Gameskraft के संस्थापकों पर क्या आरोप लगाए थे? ED ने आरोप लगाया कि कंपनी ने 187 करोड़ रुपये की अपराध आय को डायवर्ट किया और 100 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश किया।
- इस फैसले का Gameskraft पर क्या असर होगा? फैसले से Gameskraft को कानूनी राहत मिली है, लेकिन मामले की विस्तृत जांच जारी रहेगी।
स्रोत: www.hindustantimes.com