मुख्य तथ्य
फरीदाबाद के नेहरू कॉलोनी में 29-30 मई की रात को नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा किए गए विध्वंस के खिलाफ सोमवार को सैकड़ों लोगों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बुलडोजर चलाने और 'अवैध विध्वंस' का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, ध्वस्त घरों के लिए मुआवजा और विस्थापितों के पुनर्वास की मांग की।
विध्वंस का विवरण
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, नगर निगम और प्रशासन ने 70 साल पुरानी बस्ती नेहरू कॉलोनी में सैकड़ों घरों और पूजा स्थलों को ध्वस्त कर दिया। निवासियों का कहना है कि उन्हें पहले कोई खाली करने का नोटिस नहीं दिया गया, बल्कि मौखिक धमकियां दी गईं। कई परिवारों के पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली मीटर, वोटर आईडी और परिवार पहचान पत्र हैं, और वे दशकों से यहां रह रहे हैं।
नगर निगम का नोटिस
नगर निगम ने विध्वंस शुरू होने के तीन दिन बाद 2 जून को एक औपचारिक नोटिस जारी किया। नोटिस में मेट्रो रेलवे बुनियादी ढांचे के काम का हवाला देते हुए कहा गया कि पुलिया की ओर से 120 फीट से मस्जिद की ओर 160 फीट तक की जमीन एक सप्ताह के भीतर खाली की जाए। इसमें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत मुआवजा और पुनर्वास का भी उल्लेख किया गया।
प्रदर्शनकारियों के आरोप
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि नोटिस विध्वंस के बाद क्यों जारी किया गया और इसमें केवल एक विशेष खंड का उल्लेख क्यों है, जबकि मौखिक आदेशों से पूरी कॉलोनी को खाली करने को कहा गया। उन्होंने पानी और बिजली की आपूर्ति काटने और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगाने पर भी चिंता जताई।
सीटू नेता जय भगवान ने कहा, "नेहरू कॉलोनी में घरों और धार्मिक स्थलों का विध्वंस कानूनी मानदंडों की स्पष्ट अवहेलना है।" उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में समय पर नोटिस, मुआवजा आकलन और हितधारकों से बातचीत आवश्यक है, और आवासीय क्षेत्रों में विध्वंस से पहले पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह अभियान "विशिष्ट सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं और संपत्ति डीलरों" के लिए प्रधान जमीन खाली करने के लिए चलाया जा रहा है, जिससे लाखों लोग विस्थापित होंगे। एक प्रदर्शनकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "हजारों परिवारों के खून-पसीने से बने घर नष्ट किए जा रहे हैं। परिवार खुले आसमान के नीचे या सड़क किनारे तंबुओं में रह रहे हैं, और स्कूल खुलने वाले हैं।"
प्रदर्शन और मांगें
प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त कार्यालय तक मार्च किया और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें निम्नलिखित मांगें शामिल थीं:
- नेहरू कॉलोनी और अन्य कॉलोनियों में घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों के विध्वंस को तुरंत रोका जाए।
- ध्वस्त घरों और दुकानों के लिए मुआवजा और स्थानीय पुनर्वास दिया जाए।
- ध्वस्त धार्मिक स्थलों का मुआवजा और पुनर्निर्माण किया जाए।
- बुलडोजर अभियान की न्यायिक जांच हो और आदेश देने वालों व क्रियान्वयनकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
- नेहरू कॉलोनी में पानी और बिजली की आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए।
- नेहरू कॉलोनी और अन्य कॉलोनियों में पक्की गलियां, सीवरेज, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएं।
प्रशासन का रुख
नगर आयुक्त धीरेंद्र खड़गता ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह "उप न्यायिक" (sub judice) है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नेहरू कॉलोनी में विध्वंस कब हुआ?
विध्वंस 29-30 मई की रात को हुआ, जब निवासी सो रहे थे।
विध्वंस के बाद नगर निगम ने कब नोटिस जारी किया?
नगर निगम ने 2 जून को नोटिस जारी किया, जो विध्वंस के तीन दिन बाद था।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारी विध्वंस रोकने, मुआवजा, स्थानीय पुनर्वास, जल-बिजली बहाली और न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं।
विध्वंस का कारण क्या बताया गया?
नगर निगम के अनुसार, मेट्रो रेलवे बुनियादी ढांचे के काम के लिए जमीन खाली करनी थी।
स्रोत: www.thehindu.com