Himachal | Himachal News Today

इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन: भुंतर के नशा निवारण केंद्र में एक साल में आठ बच्चे भर्ती, जानें बचाव के उपाय

मुख्य तथ्य हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के भुंतर में स्थित नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र में पिछले एक साल में इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन से पीड़ित आठ बच्चों और किशोरों को भर्ती किया गया है। इनकी…

मुख्य तथ्य

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के भुंतर में स्थित नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र में पिछले एक साल में इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन से पीड़ित आठ बच्चों और किशोरों को भर्ती किया गया है। इनकी आयु 14 से 22 वर्ष के बीच है। यह चिंताजनक प्रवृत्ति दर्शाती है कि डिजिटल उपकरणों की लत अब छोटे बच्चों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।

विस्तृत जानकारी

केंद्र में उपचाररत बच्चों में मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया की लत के गंभीर लक्षण देखे गए हैं। डॉ. सत्यव्रत वैद्य, जो राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क तंत्रिका विज्ञान संस्थान बंगलूरू के शट क्लीनिक (सर्विस फॉर हेल्दी यूज ऑफ टेक्नोलॉजी) की सलाह पर उपचार कर रहे हैं, ने बताया कि इन बच्चों में अलग-अलग तरह के प्रभाव देखने को मिले हैं।

  • कुछ बच्चे मोबाइल के अलावा किसी अन्य चीज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे।
  • दो बच्चों को मोबाइल से डर लगने लगा है, उन्हें लगता है कि फोन उनकी हर बात सुन रहा है।
  • कुछ बच्चे बिना मोबाइल के दस-पंद्रह मिनट भी नहीं रह पाते।

उपचार की प्रक्रिया

डॉ. वैद्य ने बताया कि छोटे बच्चों को कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) के माध्यम से उपचार दिया जा रहा है, जबकि बड़े बच्चों को दवाइयां दी जा रही हैं। ये सभी नियमित जांच के लिए समय-समय पर केंद्र आते हैं।

क्या है इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन?

जब कोई व्यक्ति मोबाइल फोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम या वीडियो प्लेटफॉर्म का इतना अधिक उपयोग करने लगता है कि उसका दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे, तो उसे इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन कहा जाता है। यह एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जिसका समय रहते उपचार आवश्यक है।

बचाव के उपाय

डॉ. सत्यव्रत वैद्य के अनुसार, माता-पिता को निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए:

  • बच्चों के स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें।
  • भोजन और सोने के समय मोबाइल से दूरी बनाए रखें।
  • बच्चों को नियमित व्यायाम और बाहरी गतिविधियों में शामिल करें।
  • परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन क्या है?

जब कोई व्यक्ति मोबाइल, इंटरनेट, सोशल मीडिया या गेमिंग का इतना अधिक उपयोग करने लगता है कि उसका दैनिक जीवन प्रभावित हो, तो इसे इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन कहते हैं।

भुंतर केंद्र में कितने बच्चे भर्ती हुए?

पिछले एक साल में 14 से 22 वर्ष की आयु के आठ बच्चे और किशोर भर्ती किए गए।

इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन से बचाव के क्या उपाय हैं?

स्क्रीन टाइम सीमित करें, भोजन और सोने के समय मोबाइल से दूर रहें, नियमित व्यायाम करें और परिवार के साथ समय बिताएं।

Follow us on Google News

Explore more

ऊना: रामपुर बेली ब्रिज पर टूटा एंगल, विभाग की लापरवाही से बढ़ रहा हादसों का खतरा

प्रमुख तथ्य ऊना जिले के रामपुर बेली ब्रिज पर बड़े वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए लगाया गया लोहे का एंगल कई…

More on Himachal from Himachal Pradesh

सुंदरनगर में पेयजल आपूर्ति हुई प्रभावित, अब दिन में सिर्फ एक बार मिलेगा पानी

प्रमुख तथ्य सुंदरनगर (मंडी) में लगातार बारिश के कारण पेयजल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। जल शक्ति विभाग ने शहरवासियों के…

Una News: शराब की अवैध तस्करी पर लगाम के लिए संयुक्त अभियान शुरू

Key Facts Una Police, led by Superintendent of Police Sachin Hiremath, held a joint meeting with licensed liquor traders and officials from…

मंडी: कॉलेज प्राध्यापकों ने आंदोलन तेज किया, हस्ताक्षर अभियान शुरू

मुख्य बातें हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। बुधवार को…