मुख्य तथ्य
इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक चिकित्सक संघ ने रविवार को धर्मशाला में चंबा-कांगड़ा के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज को एक ज्ञापन सौंपा। संघ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को मान्यता देने की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की।
ज्ञापन का विवरण
संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रवि कुमार रबिसन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को बताया कि भारत सरकार द्वारा गठित समिति की सिफारिशों को जल्द लागू किया जाए। इससे देशभर में निजी प्रैक्टिस कर रहे लाखों चिकित्सकों को राहत मिलेगी।
सांसद का आश्वासन
डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा, 'इलेक्ट्रोहोम्योपैथी एक हर्बल औषधि विज्ञान है, जो कई दशकों से लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का प्रभावी समाधान कर रहा है।' उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वह व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और जल्द ही एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार आयुर्वेद से संबंधित चिकित्सा पद्धतियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
उपस्थित पदाधिकारी
इस अवसर पर संघ के राज्य संयोजक सुरेंद्र ठाकुर, महामंत्री सत्य प्रकाश, सचिव प्रवीण कौंडल और हेडा सलाहकार समिति के समन्वयक डॉ. उत्तम सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
इलेक्ट्रोहोम्योपैथी को मान्यता मिलने से हिमाचल प्रदेश सहित देशभर में इस पद्धति से उपचार करने वाले चिकित्सकों को कानूनी मान्यता मिलेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इलेक्ट्रोहोम्योपैथी क्या है?
इलेक्ट्रोहोम्योपैथी एक हर्बल औषधि विज्ञान है जो पौधों के अर्क पर आधारित है और दशकों से स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कर रहा है।
इलेक्ट्रोहोम्योपैथी को मान्यता क्यों जरूरी है?
मान्यता मिलने से लाखों निजी चिकित्सकों को कानूनी संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में मदद मिलेगी।
सांसद ने क्या आश्वासन दिया?
सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से इस मुद्दे पर चर्चा करने और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया।
यह ज्ञापन कहां सौंपा गया?
यह ज्ञापन धर्मशाला में चंबा-कांगड़ा लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज को सौंपा गया।