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El Nino के चलते गोदावरी डेल्टा में धान की फसल संकट में, सिंचाई की कमी से किसान परेशान

मुख्य तथ्य एल नीनो प्रभाव के कारण गोदावरी डेल्टा में धान की खेती गंभीर संकट में है। सेंट्रल गोदावरी डेल्टा में सिंचाई नहरों में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण पानी किसानों तक नहीं पहुंच…

मुख्य तथ्य

एल नीनो प्रभाव के कारण गोदावरी डेल्टा में धान की खेती गंभीर संकट में है। सेंट्रल गोदावरी डेल्टा में सिंचाई नहरों में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण पानी किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे धान की नर्सरी सूखने लगी है और रोपाई का कार्य प्रभावित हुआ है।

विस्तृत जानकारी

डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले के सेंट्रल गोदावरी डेल्टा में धान की खेती का कुल क्षेत्रफल 1.13 लाख एकड़ से अधिक है। जिला कृषि अधिकारी एम. वेंकट रामा राव के अनुसार, "सेंट्रल डेल्टा में 89% क्षेत्र में धान की नर्सरी तैयार की जा चुकी है, लेकिन 14 जुलाई तक केवल 18% क्षेत्र में ही रोपाई पूरी हो पाई है। टेल-एंड क्षेत्रों में 8,321 एकड़ से अधिक क्षेत्र गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है।"

पोलावरम, मलकीपुरम, साकिनेटिपल्ली, के. गंगावरम, अल्लावरम और उप्पलगुप्तम मंडलों में धान की नर्सरी बारिश और सिंचाई की कमी के कारण सूख रही है।

प्रभाव और किसानों की समस्या

किसानों ने मंगलवार को जिला कलेक्टर आर. महेश कुमार को अपनी समस्या से अवगत कराया। कलेक्टर ने अधिकारियों से बात कर सिंचाई नहरों और तालों में पानी का मुक्त प्रवाह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

काकीनाडा जिले में, कलेक्टर एम.एन. हरेंधिरा प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 19 जुलाई को यलेरु जलाशय से पानी छोड़ा जाएगा, जिससे 53,000 एकड़ क्षेत्र को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा, "डॉवलेश्वरम में सर आर्थर कॉटन बैराज से छोड़े गए 4,900 क्यूसेक पानी को समरलकोटा में पिठापुरम ब्रांच कैनाल में डायवर्ट किया जाएगा, ताकि 16 जुलाई तक काकीनाडा जिले में खरीफ कार्यों में तेजी आ सके।"

पश्चिम गोदावरी में उर्वरक संकट

पश्चिम गोदावरी जिले में, कलेक्टर चदलवाडा नागरानी ने बताया कि कालाबाजारी में यूरिया बेचने के आरोप में 20 उर्वरक डीलरों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, "पश्चिम गोदावरी जिले में वर्तमान में 10,555 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जबकि जून की शुरुआत में 3,322 मीट्रिक टन की आपूर्ति की गई थी।"

पश्चिम गोदावरी में खरीफ सीजन के लिए कुल 17,390 मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता है। इस जिले में खरीफ 2026-27 में धान का कुल क्षेत्रफल 2.25 लाख एकड़ और बागवानी का 25,000 एकड़ है।

किसानों को क्या करना चाहिए?

  • किसान अपने क्षेत्र के सिंचाई अधिकारियों से संपर्क कर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
  • नर्सरी को बचाने के लिए वैकल्पिक सिंचाई स्रोतों का उपयोग करें।
  • उर्वरक की कालाबाजारी की सूचना जिला प्रशासन को दें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गोदावरी डेल्टा में धान की फसल पर El Nino का क्या प्रभाव पड़ा है?

El Nino के कारण कम बारिश हुई है, जिससे धान की नर्सरी सूख रही है और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। सेंट्रल डेल्टा में 89% क्षेत्र में नर्सरी तैयार है, लेकिन केवल 18% में रोपाई हुई है।

सिंचाई की कमी के पीछे क्या कारण हैं?

नहरों में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण गोदावरी नदी से छोड़ा गया पानी किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। सेंट्रल डेल्टा में 2,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, लेकिन वह रुक गया।

किन जिलों में सबसे अधिक समस्या है?

डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले के सेंट्रल गोदावरी डेल्टा में सबसे अधिक संकट है। इसके अलावा काकीनाडा और पश्चिम गोदावरी जिलों में भी समस्या है।

सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

कलेक्टरों ने नहरों में पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। काकीनाडा में यलेरु जलाशय से पानी छोड़ा जाएगा। पश्चिम गोदावरी में कालाबाजारी रोकने के लिए 20 उर्वरक डीलरों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।

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