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Ed ने dvac द्वारा पूर्व मंत्री वैथिलिंगम के खिलाफ ₹27.90 करोड़ रिश्वत मामले को बंद करने पर आपत्ति दर्ज कराई

मुख्य तथ्य प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चेन्नई के प्रिंसिपल सेशन कोर्ट में एक प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी DVAC द्वारा पूर्व मंत्री आर. वैथिलिंगम के खिलाफ ₹27.90 करोड़ के रिश्वत मामले…

मुख्य तथ्य

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चेन्नई के प्रिंसिपल सेशन कोर्ट में एक प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी DVAC द्वारा पूर्व मंत्री आर. वैथिलिंगम के खिलाफ ₹27.90 करोड़ के रिश्वत मामले को बंद करने पर आपत्ति जताई है। वैथिलिंगम, जो पहले AIADMK में थे, जनवरी 2026 में विधायक पद से इस्तीफा देकर DMK में शामिल हो गए थे।

मामले का विवरण

DVAC ने 19 सितंबर 2024 को वैथिलिंगम के खिलाफ FIR दर्ज की थी, जब वे 2011-2016 के दौरान जयललिता मंत्रिमंडल में आवास और शहरी विकास मंत्री थे। आरोप है कि चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (CMDA) के पदेन अध्यक्ष के रूप में उन्होंने श्रीराम प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (अब गेटवे ऑफिस पार्क्स प्राइवेट लिमिटेड) से ₹27.90 करोड़ रिश्वत लेकर चेन्नई के पेरुंगलथुर स्थित GST रोड पर 57.94 एकड़ जमीन पर 1,453 अतिरिक्त भवनों के निर्माण की योजना मंजूर की।

ED की जांच और निष्कर्ष

FIR के बाद ED ने 1 अक्टूबर 2024 को PMLA के तहत ECIR दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि श्रीराम प्रॉपर्टीज की सहयोगी कंपनी भारत कोल केमिकल्स लिमिटेड ने 28 जनवरी 2016 से 4 फरवरी 2016 के बीच मुथम्मल एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड को ₹27.90 करोड़ का भुगतान किया, जो वैथिलिंगम और उनके परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी है। इस भुगतान के तुरंत बाद 24 फरवरी 2016 को लंबित योजना मंजूरी दे दी गई। ED ने कहा कि रिश्वत की राशि का उपयोग आरोपी के परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्ति खरीदने में किया गया, जिसका वर्तमान बाजार मूल्य ₹100 करोड़ से अधिक है। ED ने इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।

DVAC की क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति

ED ने अपनी जांच के निष्कर्ष DVAC के साथ 10 मार्च 2025 को साझा किए और 19 मई 2026 को पूरी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी भेजी, लेकिन इस बीच वैथिलिंगम ने AIADMK छोड़कर DMK जॉइन कर लिया। इसके तुरंत बाद फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में DVAC ने सेशन कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। ED ने इसे "सरकार बदलने से ठीक पहले और पूरे सबूतों को नजरअंदाज करते हुए" संदिग्ध बताया। प्रोटेस्ट पिटीशन में कहा गया है, "DVAC द्वारा पूर्ण और दस्तावेजी धन-लेन-देन वाले मामले में सरकार बदलने से ठीक पहले क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करना जांच की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा करता है।"

आगे की कार्यवाही

ED ने कोर्ट से DVAC की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने और राज्य एजेंसी को आगे जांच करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। इस प्रोटेस्ट पिटीशन पर 12 जून 2026 को सुनवाई होने की संभावना है।

FAQ

  • ED ने किस मामले में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की है? ED ने पूर्व मंत्री आर. वैथिलिंगम के खिलाफ ₹27.90 करोड़ की रिश्वत के मामले में DVAC द्वारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने पर आपत्ति जताई है।
  • वैथिलिंगम पर क्या आरोप हैं? उन पर आरोप है कि आवास और शहरी विकास मंत्री रहते हुए उन्होंने श्रीराम प्रॉपर्टीज से ₹27.90 करोड़ रिश्वत लेकर पेरुंगलथुर में 1,453 अतिरिक्त भवनों के निर्माण की अनुमति दी।
  • DVAC ने मामला क्यों बंद किया? DVAC ने फरवरी 2026 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसे ED ने सरकार बदलने से ठीक पहले और सबूतों को नजरअंदाज करते हुए दाखिल करने पर संदिग्ध बताया।
  • अब मामले की अगली सुनवाई कब है? प्रिंसिपल सेशन कोर्ट में इस प्रोटेस्ट पिटीशन पर 12 जून 2026 को सुनवाई होने की संभावना है।

Source: www.thehindu.com

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