प्रमुख तथ्य
ड्रोन युद्ध में एक नया अध्याय जुड़ गया है। इस सप्ताह चार ऐसी घटनाएं सामने आईं जो मानवरहित प्रणालियों के भविष्य को बदल सकती हैं। तुर्की, रूस, भारत, अमेरिका और यूक्रेन ने अपने-अपने ड्रोन प्लेटफॉर्मों को लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस कर गहरे हमलों की क्षमता प्रदर्शित की है।
तुर्की का बायकर किज़िलेल्मा
तुर्की की कंपनी बायकर ने अपने मानवरहित स्टील्थ विमान किज़िलेल्मा का सफल परीक्षण किया। इसने एक बैलिस्टिक मिसाइल दागकर 120 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को भेदा। अपने छोटे आकार और स्टील्थ डिज़ाइन के कारण यह रडार पर पकड़ में आना मुश्किल है।
रूस का ओरियन ड्रोन
रूस ने अपने ओरियन ड्रोन में S-8000 बैंडरोल एयर-लॉन्च क्रूज़ मिसाइल को एकीकृत किया है। यह ड्रोन अमेरिकी MQ-1 रीपर के समतुल्य है और अब 500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेद सकता है। छोटे ड्रोनों पर लंबी दूरी के स्टैंड-ऑफ हथियारों की तैनाती से गहरे हमलों की क्षमता बढ़ गई है।
भारत का घातक ड्रोन कार्यक्रम
भारत भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) घातक स्टील्थ ड्रोन विकसित कर रहा है। यह मानवरहित लड़ाकू विमान (UCAV) फ्लाइंग-विंग डिज़ाइन वाला है और इसमें स्वदेशी कावेरी इंजन के ड्राई वेरिएंट का उपयोग होगा। यह सटीक-निर्देशित हथियार ले जाने और दुश्मन के हवाई क्षेत्र में संचालन में सक्षम होगा, जिससे पायलटों को जोखिम में डाले बिना गहरे हमले किए जा सकेंगे।
अमेरिका का मानवरहित सतही जहाज हमला
अमेरिका ने पहली बार तीन कॉरसेयर मानवरहित सतही जहाजों (USV) का आक्रामक उपयोग किया। इन्होंने ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह पर हमला कर नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बी मरम्मत सुविधाओं को निशाना बनाया। यह हमला दर्शाता है कि USV अब युद्ध में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
यूक्रेन का बहु-डोमेन संचालन
उसी दिन, यूक्रेन ने एक जटिल स्वायत्त अभियान चलाया। एक मानवरहित जलयान ने एक मानवरहित भू-वाहन को तट पर पहुंचाया, जिसे एक हवाई ड्रोन द्वारा मार्गदर्शित किया गया। तट पर पहुंचने के बाद, भू-वाहन ने मशीन गन से रूसी ठिकानों पर हमला किया। समुद्र, हवा और जमीन के मानवरहित सिस्टमों के इस समन्वय ने सामरिक संभावनाओं का विस्तार किया है।
प्रभाव और भविष्य
ये घटनाएं दर्शाती हैं कि ड्रोन और स्वायत्त प्लेटफॉर्म अब केवल सहायक भूमिका में नहीं हैं। वे सटीक हमलों, बहु-डोमेन समन्वय और मानव जोखिम को कम करने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले वर्षों में युद्ध के स्वरूप में बड़ा बदलाव आ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ड्रोन युद्ध 2.0 से क्या अभिप्राय है?
ड्रोन युद्ध 2.0 से तात्पर्य मानवरहित हवाई, जल और भू-वाहनों के उन्नत उपयोग से है, जो लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस होकर गहरे हमले करने में सक्षम हैं। यह स्वचालन और स्वायत्तता में वृद्धि का परिणाम है।
भारत का घातक ड्रोन कार्यक्रम क्या है?
घातक भारत का स्वदेशी मानवरहित लड़ाकू विमान (UCAV) है, जिसे DRDO विकसित कर रहा है। यह फ्लाइंग-विंग डिज़ाइन वाला स्टील्थ ड्रोन है, जो कावेरी इंजन के ड्राई वेरिएंट से संचालित होगा और सटीक-निर्देशित हथियार ले जाने में सक्षम होगा।
क्या ड्रोन अब मानव चालित विमानों की जगह ले रहे हैं?
ड्रोन अभी पूरी तरह से मानव चालित विमानों की जगह नहीं ले रहे हैं, लेकिन वे तेजी से केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं, खासकर सटीक हमलों और बहु-डोमेन समन्वय में, जिससे मानव जोखिम कम होता है।
क्या अमेरिका ने ड्रोन का आक्रामक उपयोग किया है?
हां, अमेरिका ने पहली बार तीन कॉरसेयर मानवरहित सतही जहाजों का उपयोग ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह पर हमला करने के लिए किया, जो नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बी मरम्मत सुविधाओं को निशाना बनाकर किया गया।