पंजाब की सियासत में नया विवाद: Satluj फिल्म
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'Satluj' ने पंजाब की सियासत में हलचल मचा दी है। यह फिल्म, जो 2022 में पूरी होने के बाद सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी थी, हाल ही में Zee5 OTT प्लेटफॉर्म पर 48 घंटे के लिए उपलब्ध रही और फिर हटा ली गई। इस फिल्म ने पंजाब के अशांत अतीत, खासकर खालिस्तानी आंदोलन के दौरान हुई फर्जी मुठभेड़ों और सिख युवाओं की हत्याओं के मुद्दे को फिर से जिंदा कर दिया है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह फिल्म सियासी पार्टियों के लिए एक नया मुद्दा बन गई है।
सियासी पार्टियों की रणनीति
पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस फिल्म को कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) पर हमला करने का मौका बना लिया है। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि दोनों पार्टियां फर्जी मुठभेड़ों के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस ने कई मासूम युवाओं को खत्म करवाया। SAD और BJP ने पुलिस अधिकारियों को प्रमोशन दिए जो इन हत्याओं के जिम्मेदार थे। यह पंजाब के युवाओं का नरसंहार था।'
वहीं, SAD ने फिल्म को OTT से आगे ले जाने का फैसला किया है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने घोषणा की कि SAD 'Satluj' को पंजाब के गांव-गांव में दिखाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती है कि आने वाली पीढ़ियां कांग्रेस शासन के दौरान हुए अत्याचारों को जानें। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पंजाब में पंथिक स्पेस पर SAD का एकाधिकार नहीं रह गया है। 2024 के लोकसभा चुनावों में खडूर साहिब से अमृतपाल सिंह और फरीदकोट से सरबजीत सिंह खालसा जैसे कट्टर सिख नेता जीते हैं।
कांग्रेस और BJP की सावधानी
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सबसे सतर्क रुख अपनाया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि उन्होंने फिल्म नहीं देखी है और देखने के बाद ही टिप्पणी करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि अगर फिल्म सच पर आधारित है तो उस पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यह मुद्दा कांग्रेस के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है क्योंकि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं उस दौर की हैं जब कांग्रेस सरकारें सत्ता में थीं। एक कांग्रेस नेता ने कहा, 'क्या आप एक ऐसे मुख्यमंत्री की हत्या को सही ठहरा सकते हैं जिसने राज्य से आतंकवाद खत्म किया?' यह बयान दिवंगत बेअंत सिंह का जिक्र करते हुए दिया गया, जो 1992 से 1995 तक पंजाब के CM रहे और बाद में हत्या कर दिए गए।
BJP ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि OTT प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का फैसला प्लेटफॉर्म का खुद का है, केंद्र सरकार का नहीं।
सियासी समीकरण और आगे की राह
यह विवाद पंजाब की सियासी बातचीत में एक नया मोड़ लाया है। कुछ दिन पहले तक AAP सरकार महिलाओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता योजना का प्रचार कर रही थी, लेकिन अब 'Satluj' फिल्म का विवाद सारी बातों को पीछे छोड़ गया है। अकाल तख्त द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान की आलोचना के बाद सरकार पहले ही बचाव की मुद्रा में थी। अब यह फिल्म सियासी पार्टियों के लिए एक नया मुद्दा बन गई है, जिसका असर 2027 के चुनावों पर पड़ सकता है।
FAQ
Satluj फिल्म किस विवाद से घिरी है?
यह फिल्म पंजाब में खालिस्तानी आंदोलन के दौरान हुई फर्जी मुठभेड़ों और सिख युवाओं की हत्याओं पर आधारित है। इसे Zee5 OTT प्लेटफॉर्म से 48 घंटे के भीतर हटा लिया गया, जिससे सियासी बवाल मच गया।
इस फिल्म का पंजाब की राजनीति पर क्या असर पड़ा है?
फिल्म ने कांग्रेस और अकाली दल को निशाने पर ला दिया है। AAP इसे दोनों पार्टियों के खिलाफ हथियार बना रही है, जबकि SAD इसे गांवों में दिखाने की योजना बना रही है। इससे 2027 के चुनावों से पहले सियासी माहौल गरमा गया है।
कांग्रेस ने इस फिल्म पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
कांग्रेस ने सतर्क रुख अपनाया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने फिल्म देखने से इनकार किया, जबकि पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि अगर फिल्म सच पर आधारित है तो उस पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए।