मुख्य मांग
हिमाचल किसान सभा की बालीचौकी लोकल कमेटी ने बालीचौकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को सिविल अस्पताल का दर्जा देने की मांग तेज कर दी है। संगठन ने प्रदेश सरकार से अस्पताल को जल्द सिविल अस्पताल घोषित करने और नौ विशेषज्ञ चिकित्सकों समेत आवश्यक स्टाफ के पद सृजित करने की मांग की है। मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
ज्ञापन और आंदोलन की योजना
किसान सभा के राज्य कमेटी सदस्य महेंद्र सिंह राणा ने बताया कि 13 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा जाएगा, जिसमें सीएचसी को सिविल अस्पताल में अपग्रेड करने की मांग रखी जाएगी। यदि सरकार ने इस मांग पर ध्यान नहीं दिया, तो संगठन आंदोलन शुरू करेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र
बालीचौकी सीएचसी मंडी जिले की करीब 20 पंचायतों और कुल्लू जिले की छह पंचायतों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। यहां रोजाना 150 से 200 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसके बावजूद, यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद स्वीकृत नहीं हैं, जिससे मरीजों को गंभीर बीमारियों के लिए दूर जाना पड़ता है।
सरकारों पर आरोप
महेंद्र सिंह राणा ने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने बिना आवश्यक पदों के सृजन के सीएचसी को सिविल अस्पताल घोषित कर दिया था, जो एक दिखावा मात्र था। वहीं, वर्तमान कांग्रेस सरकार ने उस अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिससे स्थिति और खराब हो गई। किसान सभा ने सरकार से जल्द सिविल अस्पताल स्थापित करने और सभी आवश्यक पदों को भरने की मांग की है।
FAQ
बालीचौकी सीएचसी को सिविल अस्पताल बनाने की मांग क्यों उठाई गई है?
बालीचौकी सीएचसी मंडी की 20 और कुल्लू की 6 पंचायतों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र है, जहां रोजाना 150-200 मरीज आते हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद स्वीकृत नहीं हैं।
हिमाचल किसान सभा ने क्या कार्रवाई की है?
संगठन ने 13 जुलाई को मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया है और मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
पिछली और वर्तमान सरकारों पर क्या आरोप हैं?
पिछली BJP सरकार पर बिना पद सृजन के सिविल अस्पताल घोषित करने का आरोप है, जबकि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने अधिसूचना रद्द कर दी।