मुख्य तथ्य
दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूज़क्लिक पोर्टल और उसके संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। इस फैसले का भारतीय पत्रकार संघ (IJU) ने स्वागत किया है।
विस्तार से
भारतीय पत्रकार संघ (IJU) के अध्यक्ष बलविंदर सिंह जम्मू, महासचिव डी. सोमा सुंदर और उपाध्यक्ष वाई. नरेंद्र रेड्डी ने एक बयान में कहा कि यह फैसला देश में मीडिया स्वतंत्रता की वकालत करने वालों के लिए एक नैतिक जीत है। उन्होंने इसे स्वतंत्र आवाज़ों और आलोचनात्मक पत्रकारिता को दबाने की कोशिश करने वाली सरकारों के लिए एक करारा तमाचा बताया।
IJU ने कहा कि FIR को रद्द करके और यह टिप्पणी करके कि मामले में कानून का दुरुपयोग किया गया, दिल्ली हाईकोर्ट ने सत्तारूढ़ व्यवस्था को एक सख्त चेतावनी दी है। संघ ने मांग की कि अधिकारी स्वतंत्र मीडिया के खिलाफ शिकार बंद करें और न्यूज़क्लिक के खिलाफ दर्ज सभी अन्य मनगढ़ंत मामलों को तुरंत खारिज किया जाए।
प्रभाव
यह फैसला मीडिया स्वतंत्रता के समर्थकों के लिए एक बड़ी राहत है। IJU ने कहा कि जब तथाकथित मुख्यधारा के मीडिया संगठन कॉर्पोरेट हितों और राजनीतिक प्रचार की सेवा कर रहे हैं, तब न्यूज़क्लिक ने जनता की आवाज़ को बुलंद करने का प्रयास किया। पोर्टल ने नई दिल्ली में किसान आंदोलन पर लगातार रिपोर्टिंग की और सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछे।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
- दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला मीडिया की स्वतंत्रता को मजबूत करता है।
- इससे पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर अनुचित दबाव के खिलाफ एक मिसाल कायम हुई है।
- न्यूज़क्लिक के खिलाफ अन्य मामलों की भी समीक्षा होने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिल्ली हाईकोर्ट ने किस मामले में FIR रद्द की?
दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूज़क्लिक पोर्टल और उसके संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज FIR को रद्द कर दिया।
भारतीय पत्रकार संघ (IJU) ने इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
IJU ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे मीडिया स्वतंत्रता की नैतिक जीत बताया और सरकार पर स्वतंत्र आवाज़ों को दबाने का आरोप लगाया।
न्यूज़क्लिक पर क्या आरोप थे?
न्यूज़क्लिक पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आर्थिक अपराधों से जुड़ी FIR दर्ज की थी, जिसे हाईकोर्ट ने कानून के दुरुपयोग का मामला बताते हुए रद्द कर दिया।