मुख्य तथ्य
देहरा स्थित फैमिली कोर्ट ने एक महिला की तलाक की अर्जी को मंजूर कर लिया है, जिसमें उसने पति पर मानसिक और शारीरिक क्रूरता का आरोप लगाया था। अदालत ने पाया कि पति ने शराब के नशे में मारपीट की, जिससे महिला का गर्भपात हो गया। हालांकि, 20 लाख रुपये के स्थायी गुजारा भत्ते की मांग को साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया गया।
मामले का विवरण
याचिकाकर्ता महिला ने अदालत को बताया कि वर्ष 2020 में विवाह के बाद से पति का व्यवहार असामान्य था। वह शराब के नशे में मारपीट करता था, जिसके कारण एक बार उसका गर्भपात हो गया। पति और उसके परिजनों की ओर से लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई और भरण-पोषण नहीं किया गया। इससे महिला को जान का खतरा महसूस हुआ और वह मायके में रहने को मजबूर हो गई।
अदालत का फैसला
अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट सपना पांडेय की अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों से पत्नी के साथ क्रूरता और परित्याग के आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं। पति अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई। अदालत ने विवाह विच्छेद का आदेश देते हुए कहा कि दोनों के साथ रहने की संभावना समाप्त हो चुकी है।
गुजारा भत्ते पर निर्णय
महिला ने 20 लाख रुपये के स्थायी गुजारा भत्ते की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पति की आय और आर्थिक स्थिति का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके चलते यह मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
प्रभाव और सबक
यह फैसला उन महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है जो वैवाहिक क्रूरता का सामना कर रही हैं। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर तलाक मंजूर किया, लेकिन गुजारा भत्ते के लिए ठोस आर्थिक सबूतों की आवश्यकता पर बल दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किस आधार पर तलाक मंजूर किया गया?
पति द्वारा मानसिक और शारीरिक क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर किया गया।
पत्नी को गुजारा भत्ता क्यों नहीं मिला?
पति की आय और आर्थिक स्थिति के ठोस साक्ष्य नहीं मिलने के कारण 20 लाख रुपये की स्थायी गुजारा भत्ते की मांग खारिज कर दी गई।
अदालत में पति पेश क्यों नहीं हुआ?
पति अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई।
महिला ने क्या सबूत पेश किए?
महिला ने अपने और परिजनों के शपथ पत्र तथा चिकित्सा रिकॉर्ड पेश किए, जिनमें गर्भपात का भी उल्लेख था।