मुख्य तथ्य
बेंगलुरु स्थित प्रसिद्ध प्रदर्शन कला समूह प्रभात कलाविदारु 13 जून 2026 को रवींद्र कलाक्षेत्र, बेंगलुरु में अपना संगीतमय नृत्य-नाटक 'सिंड्रेला' प्रस्तुत करेगा। यह प्रस्तुति मूल रूप से 1978 में शुरू हुई थी और तब से पूरे भारत में 1,000 से अधिक बार मंचित की जा चुकी है।
प्रस्तुति का विवरण
समूह के अनुसार, यह नाटक अपनी कोरियोग्राफी, हवाई प्रभावों, सिनेमाई 3D पृष्ठभूमि और संगीत स्कोर के लिए जाना जाता है। एक आधिकारिक नोट में कहा गया है, "एक पारंपरिक नाटक के विपरीत, सिंड्रेला एक भव्य संगीतमय नृत्य-नाटक है जो फंतासी, संगीत, कोरियोग्राफी और नाटकीय तमाशा को जोड़ता है। यह कालजयी परी कथा से प्रेरित होने के बावजूद, इसे भारतीय दर्शकों के लिए विशेष रूप से अनुकूलित किया गया है जिसमें विशेष रूप से निर्मित पात्र, जीवंत कहानी और भावनात्मक रूप से आकर्षक प्रदर्शन शामिल हैं।"
कलाकार और रचनाकार
इस नाटक का संगीत मूल रूप से मैसूर अनंतस्वामी द्वारा रचित था और हाल ही में प्रवीण डी. राव द्वारा पुनर्जीवित किया गया है। प्रस्तुति में दिवंगत डॉ. एस.पी. बालासुब्रमण्यम की प्रतिष्ठित आवाज़ भी शामिल है। निर्देशन टी.वी. गोपीनाथदास ने किया है, कोरियोग्राफी हेमा प्रभात ने, और मुख्य भूमिकाओं में हरीश प्रभात और दीपाश्री हरीश हैं।
दर्शकों के लिए महत्व
यह प्रस्तुति न केवल बच्चों बल्कि सभी उम्र के दर्शकों के लिए एक मनोरंजक अनुभव प्रदान करेगी। भारतीय संदर्भ में ढाली गई यह कहानी पारिवारिक मनोरंजन का एक बेहतरीन माध्यम है।
FAQ
सिंड्रेला नृत्य-नाटक का आयोजन कब और कहाँ होगा?
यह 13 जून 2026 को बेंगलुरु के रवींद्र कलाक्षेत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।
इस प्रस्तुति की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
यह एक भव्य संगीतमय नृत्य-नाटक है जिसमें फंतासी, संगीत, कोरियोग्राफी और नाटकीय तमाशा शामिल है। इसे भारतीय दर्शकों के लिए विशेष रूप से अनुकूलित किया गया है।
इस नाटक में कौन-कौन कलाकार शामिल हैं?
मुख्य भूमिकाओं में हरीश प्रभात और दीपाश्री हरीश हैं। संगीत मैसूर अनंतस्वामी द्वारा रचित और प्रवीण डी. राव द्वारा पुनर्जीवित किया गया है, जिसमें दिवंगत डॉ. एस.पी. बालासुब्रमण्यम की आवाज़ शामिल है।