जलधारा योजना: चित्तूर में जल संरक्षण को प्राथमिकता
चित्तूर जिले में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को मजबूत करने के उद्देश्य से जलधारा योजना के तहत सभी कार्यों को 25 जून तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कलेक्टर सुमित कुमार ने सिंचाई, ग्रामीण विकास और एनआरईजीए विभागों के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिया।
प्रमुख तथ्य और निर्देश
- कलेक्टर ने छोटे सिंचाई तालाबों से जुड़े फीडर चैनलों की बहाली के कार्यों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया।
- अधिकारियों को हर पूर्ण कार्य का भौतिक सत्यापन करने और गुणवत्ता प्रमाण पत्र जमा करने के निर्देश दिए गए।
- प्रमाणन प्रक्रिया में अनियमतियां पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
भूजल स्तर में गिरावट पर चिंता
कलेक्टर ने चित्तूर के कई हिस्सों में भूजल स्तर में लगभग छह मीटर की गिरावट पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जलधारा कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाना चाहिए।
MGNREGA और विशेष फंडिंग का उपयोग
कलेक्टर ने कहा, "तालाबों की सफाई और फीडर चैनलों की बहाली MGNREGA कार्यबल के माध्यम से की जानी चाहिए, जबकि कठिन इलाकों में विशेष फंडिंग प्रावधानों के तहत उपलब्ध मशीनरी तैनात की जाए।"
मंडलवार प्रगति और निगरानी
कलेक्टर ने पेद्दा पंजानी, पालमनेर, वी. कोटा, बैरेड्डीपल्ले और गंगावरम मंडलों में कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने हर तालाब से संबंधित कार्य का विवरण एक समर्पित मॉनिटरिंग ऐप पर अपलोड करने के निर्देश दिए ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
कार्यों की स्थिति
अधिकारियों ने बताया कि जिले में 1,482 जलधारा संबंधित कार्यों की पहचान की गई है, जिनमें से 1,355 को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। 546 तालाब बहाली कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जलधारा योजना क्या है?
जलधारा योजना चित्तूर जिले में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए एक पहल है, जिसमें तालाबों की सफाई और फीडर चैनलों की बहाली शामिल है।
चित्तूर में जलधारा योजना के तहत कितने कार्य पूरे हुए हैं?
1,482 कार्यों की पहचान की गई है, जिनमें से 1,355 को प्रशासनिक मंजूरी मिली है और 546 तालाब बहाली कार्य पूरे हो चुके हैं।
जलधारा कार्यों में MGNREGA की क्या भूमिका है?
MGNREGA कार्यबल का उपयोग तालाबों की सफाई और फीडर चैनलों की बहाली के लिए किया जाएगा, जबकि कठिन इलाकों में विशेष फंडिंग के तहत मशीनरी तैनात की जाएगी।
स्रोत: www.thehindu.com