प्रमुख तथ्य
यादगीर में शुक्रवार को विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एच.जे. मारुलसिद्दाराध्य ने बाल श्रम को जड़ से खत्म करने के लिए सभी हितधारकों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि बाल श्रम न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह राष्ट्र के विकास में भी बाधक है।
कार्यक्रम का विवरण
इस कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रशासन, जिला पंचायत, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल कल्याण विभाग, जिला बाल श्रम परियोजना सोसायटी, जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस विभाग और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या 112 के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
न्यायाधीश का संदेश
न्यायाधीश मारुलसिद्दाराध्य ने कहा, “कानून न केवल बाल श्रम को रोकता है, बल्कि यदि कोई नागरिक 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को मजदूर के रूप में उपयोग करता पाया जाता है तो उसे दंडित भी करता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि बाल श्रम राष्ट्र को अविकसित रखता है और किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।
अन्य अधिकारियों के विचार
अतिरिक्त उपायुक्त रमेश कोलार ने कहा कि बच्चों के साथ मानवीय दृष्टिकोण से व्यवहार किया जाना चाहिए और उन्हें शिक्षा सहित सभी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए ताकि वे देश का भविष्य बन सकें। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य-सचिव मारियप्पा ने उपस्थित जनसमूह को बाल श्रम रोकने की शपथ दिलाई।
जागरूकता रैली
कार्यक्रम से पहले बाल श्रम के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक जागरूकता रैली निकाली गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धरनेश सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
प्रभाव और आगे की राह
इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में बाल श्रम के प्रति जागरूकता बढ़ाना और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। न्यायाधीश ने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को शिक्षा दें और उन्हें मजदूरी करने के लिए मजबूर न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बाल श्रम कानून के अनुसार कितने वर्ष से कम आयु के बच्चों को काम पर नहीं लगाया जा सकता?
कानून के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को काम पर लगाना अपराध है।
बाल श्रम की सूचना कहाँ दी जा सकती है?
बाल श्रम की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या 112 पर दी जा सकती है।
बाल श्रम उन्मूलन के लिए कौन-कौन से विभाग जिम्मेदार हैं?
जिला प्रशासन, जिला पंचायत, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल कल्याण विभाग, जिला बाल श्रम परियोजना सोसायटी, जिला बाल संरक्षण इकाई और पुलिस विभाग इसके लिए जिम्मेदार हैं।
स्रोत: www.thehindu.com