विवाद की शुरुआत
शिमला के छोटा शिमला क्षेत्र में बिजली बोर्ड के 630 केवी सब स्टेशन को शिफ्ट करने के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया है। स्थानीय निवासियों ने इस कदम पर गंभीर आपत्ति जताई है, उनका कहना है कि इससे बिजली आपूर्ति प्रभावित होगी और सरकारी धन की बर्बादी होगी।
स्थानीय लोगों का विरोध
छोटा शिमला के निवासी विनोद मलिक ने कहा, "इस सब स्टेशन के शिफ्ट होने से स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।" उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सब स्टेशन हटाने से क्षेत्र में बिजली की कमी हो सकती है। कई अन्य निवासियों ने भी इस फैसले की निंदा की और प्रशासन से मामले की समीक्षा करने की मांग की।
नगर निगम का पक्ष
दूसरी ओर, नगर निगम का कहना है कि यह जमीन निगम की है और यहां जनता की मांग पर एक सामुदायिक केंद्र बनाया जा रहा है। महापौर सुरेंद्र चौहान ने बताया, "यह जगह नगर निगम की है। यहां जनता की मांग पर सामुदायिक केंद्र बनाया जा रहा है। इसका नक्शा भी पास हो गया है।" उन्होंने कहा कि इस परियोजना से हजारों लोगों को लाभ होगा और पार्किंग की सुविधा भी मिलेगी।
बिजली बोर्ड का रुख
बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता तनुज गुप्ता ने बताया कि काम शुरू होने की सूचना मिलने के बाद नगर निगम के अभियंता को नोटिस दिया गया है। उन्होंने कहा, "जवाब मिला है कि नगर निगम के महापौर के साथ जल्द ही मौके पर ज्वाइंट इंस्पेक्शन की जाएगी।" बिजली बोर्ड का कहना है कि वह किसी भी ऐसे कदम का विरोध करेगा जो बिजली आपूर्ति को प्रभावित करे।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है। संयुक्त निरीक्षण के बाद ही इस मामले में कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
छोटा शिमला में सब स्टेशन क्यों शिफ्ट किया जा रहा है?
नगर निगम का कहना है कि यह जगह निगम की है और यहां जनता की मांग पर सामुदायिक केंद्र बनाया जा रहा है, जिसका नक्शा पास हो चुका है।
स्थानीय लोगों की मुख्य चिंता क्या है?
लोगों को डर है कि सब स्टेशन शिफ्ट होने से बिजली आपूर्ति प्रभावित होगी और पैसों की बर्बादी होगी।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता ने बताया कि नगर निगम के महापौर के साथ जल्द ही संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा।