चंबा में यूरिया संकट: किसानों की बेचैनी बढ़ी, मक्की की फसल पर खतरा
चंबा जिले में यूरिया खाद की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तीन महीने से सप्लाई ठप होने के कारण किसान बिक्री केंद्रों और सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। मक्की की फसल को पोषण की आवश्यकता है, लेकिन यूरिया न मिलने से उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है।
किन क्षेत्रों में है समस्या?
जिले के चंबा, सलूणी, चुराह, साहो और भरमौर क्षेत्रों के किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं। वे सुबह से शाम तक खाद की तलाश में भटक रहे हैं। किसानों का कहना है कि पहले कभी इतनी बड़ी समस्या नहीं हुई थी। हर सीजन में समय पर खाद मिल जाती थी, लेकिन इस बार यूरिया की कमी ने उन्हें परेशान कर दिया है।
किसानों की आवाज
तेज सिंह, धर्म राज, मदन लाल, किशोरी लाल, कुलदीप कुमार, मोहम्मद यासीन और नजीर खान ने बताया कि पहले कभी खाद को लेकर इतनी परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा, 'हर सीजन में समय पर खाद मिल जाती थी, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चिंता यूरिया की हो रही है। फसल खेतों में तैयार हो रही है, समझ नहीं आ रहा कि उसे पोषण कैसे दें।' मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान के बीच खाद की कमी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
कृषि विभाग का रुख
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इस समय मक्की की फसल को यूरिया खाद की काफी जरूरत है, लेकिन सप्लाई नहीं आ रही है। उन्होंने बताया कि इस बारे में सरकार और उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। विभाग जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहा है।
किसानों पर प्रभाव
यूरिया की कमी का सीधा असर मक्की की पैदावार पर पड़ेगा। किसानों को डर है कि अगर समय पर खाद नहीं मिली तो फसल बर्बाद हो सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति चरमरा जाएगी। कई किसानों ने बताया कि वे पहले से ही मौसम और जंगली जानवरों से जूझ रहे हैं, अब यूरिया की कमी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चंबा में यूरिया की कमी क्यों है?
कृषि विभाग के अनुसार, सप्लाई नहीं आ रही है। विभाग ने सरकार और उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया है।
यूरिया की कमी से कौन सी फसल प्रभावित हो रही है?
मक्की की फसल को सबसे अधिक नुकसान होने की आशंका है, क्योंकि इस समय फसल को यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
किसानों को किन क्षेत्रों में परेशानी हो रही है?
चंबा, सलूणी, चुराह, साहो और भरमौर क्षेत्रों के किसान बिक्री केंद्रों और सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं।