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मरीना बीच पर सजे सेंचुरियन टैंक: भारतीय सेना की वीरता की निशानी

मुख्य तथ्य चेन्नई के मरीना बीच पर अब एक नया आकर्षण है – सेंचुरियन युद्धक टैंक। ये वे वीर योद्धा हैं जिन्होंने 1953 से 1980 के दशक तक भारतीय सेना की सेवा की। भारतीय सेना…

मुख्य तथ्य

चेन्नई के मरीना बीच पर अब एक नया आकर्षण है - सेंचुरियन युद्धक टैंक। ये वे वीर योद्धा हैं जिन्होंने 1953 से 1980 के दशक तक भारतीय सेना की सेवा की। भारतीय सेना मुख्यालय, दक्षिण भारत क्षेत्र द्वारा इन टैंकों को प्रमुख स्थानों पर स्थापित किया गया है, और ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने इनके लिए विशेष प्लिंथ तैयार किए हैं।

विस्तार से जानकारी

एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत ने अपने बख्तरबंद कोर को आधुनिक बनाने के लिए यू.के. से ये टैंक खरीदे थे। 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों सहित कई युद्धों में इन टैंकों के अविश्वसनीय प्रदर्शन के कारण इन्हें 'बहादुर' की उपाधि मिली।

1965 का असल उत्तर युद्ध

1965 के असल उत्तर युद्ध में भारतीय सेंचुरियन टैंकों ने पाकिस्तान के उन्नत M47 और M48 पैटन टैंकों को नष्ट कर दिया, जिससे इन्हें 'पैटन किलर' का उपनाम मिला।

1971 का बसंतर युद्ध

1971 के बसंतर युद्ध में, पूना हॉर्स रेजिमेंट के सेंचुरियन टैंकों ने पाकिस्तानी सेना का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तकनीकी विशेषताएँ और सेवानिवृत्ति

इन टैंकों में भारी कवच था और इन्हें 105 mm L7 राइफल्ड गन से अपग्रेड किया गया था। 1980 के दशक में इनकी जगह स्वदेशी विजयंता और सोवियत निर्मित T-72 'अजेय' टैंकों ने ले ली। सेवानिवृत्ति के बाद भी कुछ टैंकों का उपयोग स्थिर तोपखाने या मोबाइल हॉवित्जर के रूप में नियंत्रण रेखा पर किया गया।

प्रभाव और महत्व

यह पहल भारतीय सेना की जनता तक पहुंच और सैन्य विरासत को करीब लाने का प्रयास है। सेंचुरियन टैंक वीरता, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव के स्थायी प्रतीक के रूप में काम करेंगे, और युवा पीढ़ी को कर्तव्य और अनुशासन के मूल्यों से प्रेरित करेंगे।

पाठकों के लिए सुझाव

आगंतुकों से अनुरोध है कि वे इन प्रदर्शनों की गरिमा बनाए रखें और इन्हें राष्ट्र की सेवा करने वाले सैनिकों के साहस, बलिदान और समर्पण की स्थायी याद के रूप में देखें। यह पहल भारतीय सेना, तमिलनाडु सरकार और ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के सहयोग से नागरिक-सैन्य समन्वय को भी दर्शाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • Centurion टैंक कब से कब तक सेना में रहे? Centurion टैंक 1953 में भारतीय सेना में शामिल हुए और 1980 के दशक तक सेवा में रहे।
  • इन टैंकों को 'पैटन किलर' क्यों कहा जाता है? 1965 के असल उत्तर युद्ध में इन टैंकों ने पाकिस्तान के उन्नत M47 और M48 पैटन टैंकों को नष्ट कर दिया था, जिससे यह उपनाम मिला।
  • मरीना बीच पर ये टैंक क्यों लगाए गए? यह भारतीय सेना की जनता तक पहुंच और सैन्य विरासत को करीब लाने की पहल का हिस्सा है, ताकि लोग सेना के बलिदान और सेवा को समझ सकें।

स्रोत: www.thehindu.com

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