मुख्य तथ्य
पट्टाली मक्कल काची (PMK) के नेता अनबुमणि रामदास ने शुक्रवार (12 जून, 2026) को तमिलनाडु सरकार से कावेरी डेल्टा जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने और किसानों को राहत प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि कमजोर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून और कर्नाटक के जलाशयों में कम भंडारण के कारण डेल्टा क्षेत्रों में कुरुवाई खेती गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
विस्तृत जानकारी
एक बयान में, रामदास ने कहा कि मेट्टूर जलाशय में भंडारण केवल 41.64 tmcft रह गया है, जिसके परिणामस्वरूप पानी छोड़ने में देरी हुई है। उन्होंने आगाह किया कि अपर्याप्त खेती से लगभग ₹2,000 करोड़ का उत्पादन नुकसान हो सकता है और लाखों कृषि मजदूर प्रभावित हो सकते हैं।
प्रभाव और सिफारिशें
रामदास ने निम्नलिखित उपायों की मांग की:
- डेल्टा जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करना और सूखा राहत प्रदान करना
- वैकल्पिक अल्पकालिक फसलों पर परामर्श
- कुरुवाई पैकेज के तहत ₹5,000 प्रति एकड़ इनपुट सब्सिडी
- किसानों के लिए निर्बाध तीन-फेज बिजली आपूर्ति
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह स्थिति कावेरी डेल्टा के किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय है, जो कुरुवाई सीजन के दौरान सिंचाई के लिए मेट्टूर जलाशय से पानी पर निर्भर हैं। सरकार को शीघ्र कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कावेरी डेल्टा में सूखे की स्थिति क्यों है?
मेट्टूर जलाशय में पानी का स्तर केवल 41.64 tmcft रह गया है, जिससे पानी छोड़ने में देरी हुई है। कर्नाटक के जलाशयों में भी कम भंडारण है और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर है।
अनबुमणि रामदास ने क्या मांग की है?
उन्होंने कावेरी डेल्टा जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने, किसानों को ₹5,000 प्रति एकड़ इनपुट सब्सिडी, तीन-फेज बिजली आपूर्ति और वैकल्पिक फसलों पर परामर्श की मांग की है।
कुरुवाई खेती पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
अपर्याप्त सिंचाई से लगभग ₹2,000 करोड़ का उत्पादन नुकसान हो सकता है और लाखों कृषि मजदूर प्रभावित हो सकते हैं।