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इलायची की फसल पर संकट: मानसून की कमी से उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका

मुख्य तथ्य केरल के इडुक्की जिले में इलायची की फसल के लिए मानसून की कमी गंभीर चिंता का विषय बन गई है। जुलाई में आगामी कटाई सीजन से पहले, पर्याप्त बारिश न होने से किसानों…

मुख्य तथ्य

केरल के इडुक्की जिले में इलायची की फसल के लिए मानसून की कमी गंभीर चिंता का विषय बन गई है। जुलाई में आगामी कटाई सीजन से पहले, पर्याप्त बारिश न होने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 17 जून तक इडुक्की में 38% कम बारिश दर्ज की गई है। सामान्य बारिश 370.4 मिमी के मुकाबले केवल 228.6 मिमी हुई है।

विस्तृत जानकारी

इलायची के पौधों के स्वास्थ्य के लिए मानसून की बारिश अत्यंत आवश्यक है। इसकी कमी से फूलों और फलों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। स्पाइसेस बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, किसानों से शिकायतें आ रही हैं कि उर्वरक और कीटनाशकों के प्रयोग के बावजूद नए कैप्सूल नहीं लग रहे हैं। एक सूत्र ने कहा, "हमने अगले सीजन के उत्पादन का आंकड़ा अभी एकत्र नहीं किया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि वर्तमान जलवायु इलायची के पौधों के लिए अनुकूल नहीं है।"

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

इडुक्की स्थित कृषि सलाहकार प्रिंस मैथ्यू ने कहा कि जलवायु में उतार-चढ़ाव इस सीजन में इलायची क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, "आमतौर पर इलायची उगाने वाले क्षेत्रों में जून, जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होती है और तापमान 20℃ से 25℃ के बीच रहता है। लेकिन इस वर्ष, यदि एक दिन बारिश होती है तो तापमान 20℃ तक गिर जाता है, और अगले दिन अत्यधिक गर्मी लौट आती है। यह जलवायु उतार-चढ़ाव पौधों पर गंभीर तनाव पैदा कर रहा है।"

उत्पादन पर संभावित प्रभाव

केरल प्लांटेशन बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के सदस्य और बागान मालिक स्टैनी पोथेन ने चेतावनी दी कि मानसून की विफलता ने चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने कहा, "जून का महीना इलायची किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, और बारिश की कमी पूरे सीजन की पैदावार को प्रभावित कर सकती है। हम अगले कटाई सीजन में उत्पादन में भारी गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं।"

विशेषज्ञों की राय

आरएआरएस अम्बालावयाल में कृषि मौसम विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर शाजीश जान ने कहा कि वर्तमान मौसम पैटर्न मानसून में लंबे अंतराल के कारण प्रारंभिक सीजन के सूखे के विकास का संकेत देता है। उन्होंने कहा, "मानसून की बारिश काली मिर्च, धान, इलायची और अन्य बागान फसलों के विकास और उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण है। इलायची में, मानसून की बौछारें फूलने, फल लगने और कैप्सूल विकास में अभिन्न भूमिका निभाती हैं। यदि मानसून में यह विराम जारी रहता है, तो महत्वपूर्ण नमी तनाव हो सकता है, जिससे फसल की वृद्धि और उपज कम हो सकती है। इलायची में, लंबे समय तक शुष्क परिस्थितियां बीन सेटिंग को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती हैं और परिणामस्वरूप आगामी कटाई सीजन में उत्पादन कम हो सकता है।"

डॉ. जान ने आगे कहा, "IMD ने एल नीनो स्थितियों के प्रभाव के कारण जून में सामान्य से कम बारिश की संभावना का संकेत दिया है। प्रचलित मौसम की स्थिति एक उभरते प्रारंभिक सीजन के सूखे परिदृश्य का सुझाव देती है, और यदि वर्षा की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो पूरे क्षेत्र में कई वर्षा आधारित और बागान फसलों में उपज में कमी की उम्मीद की जा सकती है।"

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

  • इलायची की फसल के लिए मानसून की बारिश अत्यंत आवश्यक है।
  • इडुक्की में 38% कम बारिश ने किसानों को चिंतित कर दिया है।
  • एल नीनो के कारण आगे भी कम बारिश की संभावना है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलायची की फसल के लिए मानसून क्यों महत्वपूर्ण है?

मानसून की बारिश इलायची के पौधों के फूलने, फल लगने और कैप्सूल विकास के लिए आवश्यक है। पर्याप्त नमी के बिना फसल की पैदावार गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

इडुक्की में इस साल कितनी बारिश हुई है?

17 जून तक इडुक्की जिले में सामान्य बारिश 370.4 मिमी के मुकाबले केवल 228.6 मिमी बारिश हुई है, जो 38% की कमी है।

एल नीनो का इलायची उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

एल नीनो के कारण जून में सामान्य से कम बारिश की संभावना है, जिससे सूखे जैसी स्थिति बन सकती है और इलायची सहित कई फसलों की पैदावार घट सकती है।

किसानों को क्या सलाह दी गई है?

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे नमी बचाने के उपाय करें और मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखें। फिलहाल स्थिति चिंताजनक है और आगामी सीजन में उत्पादन में गिरावट की आशंका है।

स्रोत: www.thehindu.com

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