मुख्य बिंदु
हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ ने उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी बायोमेट्रिक उपस्थिति संबंधी पत्र में प्रयुक्त भाषा पर आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि आदेश में कुछ टिप्पणियां शिक्षकों की निष्ठा और ईमानदारी पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, जो अनुचित हैं।
विवरण
संघ के महासचिव डॉ. संजय कांगो ने बताया कि राज्य में मार्च 2026 से जियोफेंस आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। संघ पारदर्शिता और जवाबदेही का समर्थन करता है, लेकिन उस भाषा का विरोध करता है जो शिक्षकों के कार्य और प्रतिबद्धता पर सामान्यीकृत टिप्पणी करती है।
शिक्षकों की बहुआयामी भूमिका
डॉ. कांगो ने कहा कि कॉलेज शिक्षक केवल अध्यापन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रवेश, परीक्षा, शोध, एनएएसी प्रत्यायन, छात्र मार्गदर्शन, एनएसएस, एनसीसी, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, करियर काउंसिलिंग, निर्वाचन कार्य, आपदा प्रबंधन जैसे अनेक दायित्व निभाते हैं। ऐसे में प्रशासनिक आदेश में ऐसी भाषा का प्रयोग जो शिक्षकों को गंभीर नहीं बताती, अनुचित है।
पूरे समुदाय को बदनाम न करें
संघ के उपाध्यक्ष डॉ. निखिल सारटा ने कहा कि यदि कहीं अनियमितता हो तो विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है, लेकिन कुछ मामलों के आधार पर पूरे शिक्षक समुदाय पर सवाल उठाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने विभाग और शिक्षकों के बीच आपसी विश्वास और सम्मान पर जोर दिया।
FAQ
शिक्षक संघ ने बायोमेट्रिक हाजिरी का विरोध क्यों किया?
संघ ने बायोमेट्रिक प्रणाली का नहीं, बल्कि आदेश में प्रयुक्त भाषा का विरोध किया, जिसमें शिक्षकों की निष्ठा और प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए गए।
शिक्षक संघ ने क्या मांग की है?
संघ ने मांग की है कि प्रशासनिक पत्राचार में सम्मानजनक भाषा का प्रयोग किया जाए और पूरे शिक्षक समुदाय को बदनाम न किया जाए।
बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली कब लागू होने वाली है?
यह प्रणाली मार्च 2026 से शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए लागू की जानी है।