Desh Duniya | जनहित याचिका

मद्रास उच्च न्यायालय में बायोगैस उत्पादन के लिए व्यापक योजना की मांग वाली जनहित याचिका दायर

प्रमुख तथ्य मद्रास उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें तमिलनाडु सरकार से गीले जैविक कचरे का उपयोग करके विकेंद्रीकृत बायोगैस उत्पादन के लिए एक व्यापक राज्य-स्तरीय योजना बनाने का…

प्रमुख तथ्य

मद्रास उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें तमिलनाडु सरकार से गीले जैविक कचरे का उपयोग करके विकेंद्रीकृत बायोगैस उत्पादन के लिए एक व्यापक राज्य-स्तरीय योजना बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। यह याचिका चेन्नई के मडिपक्कम निवासी एस.पी. सुरेंद्रनाथ कार्तिक ने दायर की है।

याचिका का विवरण

याचिका में कहा गया है कि बायोगैस स्वच्छ, नवीकरणीय और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत प्रदान कर सकता है, जो बिजली की मांग को पूरा करने में सहायक होगा। लाखों टन जैविक कचरे से आसानी से बायोगैस का उत्पादन किया जा सकता है, जो घरों, होटलों, कारखानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलता है।

याचिकाकर्ता ने बताया कि गीले कचरे के अनुचित निपटान से पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है, जिसमें सतही और भूजल का प्रदूषण शामिल है। इसी कचरे का उपयोग बायोगैस उत्पादन के लिए किया जा सकता है।

सरकार से मांगें

  • याचिकाकर्ता ने 22 मई को राज्य सरकार को एक प्रतिनिधित्व दिया था, जिसमें विकेंद्रीकृत घरेलू बायोगैस नीति बनाने के लिए पहले कदम के रूप में एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का आग्रह किया गया था।
  • राज्य सरकार और ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन को कुछ शहरी स्थानीय निकायों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि वैज्ञानिक तरीके से गीले कचरे का उपयोग करके विकेंद्रीकृत बायोगैस उत्पादन किया जा सके।
  • बाद में इस योजना को पूरे राज्य में समयबद्ध तरीके से विस्तारित किया जा सके।

सुनवाई की तिथि

इस जनहित याचिका को मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पहली खंडपीठ के समक्ष सोमवार, 15 जून 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

यह याचिका बायोगैस उत्पादन के माध्यम से जैविक कचरे के प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन के लिए एक स्थायी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह योजना लागू होती है, तो यह न केवल पर्यावरण प्रदूषण को कम करेगी बल्कि ऊर्जा सुरक्षा में भी योगदान देगी।

FAQ

यह जनहित याचिका किसने दायर की है?

चेन्नई के मडिपक्कम निवासी एस.पी. सुरेंद्रनाथ कार्तिक ने यह जनहित याचिका दायर की है।

याचिका में क्या मांग की गई है?

तमिलनाडु सरकार से विकेंद्रीकृत बायोगैस उत्पादन के लिए एक व्यापक राज्य-स्तरीय योजना बनाने और पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की मांग की गई है।

इस याचिका पर सुनवाई कब होगी?

मद्रास उच्च न्यायालय की पहली खंडपीठ 15 जून 2026 को इस याचिका पर सुनवाई करेगी।

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