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भुवनेश्वर घोषणा: जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्र बनाने का रोडमैप

मुख्य तथ्य केंद्र सरकार ने जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRI) को उत्कृष्टता केंद्र में बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया है। 9 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन…

मुख्य तथ्य

केंद्र सरकार ने जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRI) को उत्कृष्टता केंद्र में बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया है। 9 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन पर 'भुवनेश्वर घोषणा' को अपनाया गया। यह घोषणा संस्थागत सुधारों, प्रौद्योगिकी एकीकरण, बेहतर अनुसंधान मानकों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से TRI को आधुनिक बनाने का व्यापक ढांचा प्रस्तुत करती है।

विस्तृत जानकारी

यह कार्यशाला केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय और ओडिशा सरकार के सहयोग से आयोजित की गई थी। इसमें लगभग 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें TRI के प्रतिनिधि, राज्य जनजातीय कल्याण विभाग, शिक्षाविद्, अनुसंधान संगठन, प्रौद्योगिकी संस्थान, उद्योग और नागरिक समाज शामिल थे।

घोषणा में निम्नलिखित प्रमुख प्रस्ताव शामिल हैं:

  • मॉडल TRI फ्रेमवर्क 2030: राज्यों में शासन, स्टाफिंग और अनुसंधान गुणवत्ता को मानकीकृत करना।
  • राष्ट्रीय TRI अनुसंधान एजेंडा (2027-2032): जनजातीय अनुसंधान के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करना।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अनुसंधान, योजना और सेवा वितरण में सुधार।
  • उत्कृष्टता केंद्र: TRI को विशेष अनुसंधान में अग्रणी बनाना और नोडल TRI प्रणाली के माध्यम से नए संस्थानों को मेंटर करना।
  • प्रदर्शन-आधारित रैंकिंग: संस्थानों की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के लिए एक ढांचा।
  • नीति संक्षेप और डैशबोर्ड: सुलभ नीति दस्तावेज और डेटा विज़ुअलाइज़ेशन टूल विकसित करना।
  • भाषा और ज्ञान का दस्तावेज़ीकरण: जनजातीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण।
  • साझा प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा: संसाधनों के दोहराव को कम करना।

प्रभाव और महत्व

जनजातीय कार्य सचिव रंजना चोपड़ा ने कहा, "TRI जनजातीय समुदायों की आवाज हैं। उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और सामुदायिक वास्तविकताओं पर आधारित वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त उत्कृष्टता केंद्र बनना चाहिए। उन्हें अधिक संस्थागत और वित्तीय स्वायत्तता की आवश्यकता है और उन्हें अनुसंधान, नीति और सेवा के बीच की खाई को पाटना होगा।"

संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पांडेय ने कहा कि कार्यशाला से निकली सिफारिशें संस्थागत क्षमता बढ़ाने, अनुसंधान उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकी अपनाने और राज्यों व अन्य हितधारकों के साथ सहयोग को बढ़ावा देने का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करती हैं।

मंत्रालय ने जनजातीय विरासत के अनुसंधान, दस्तावेज़ीकरण और संरक्षण में योगदान के लिए सात सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले TRI को पुरस्कृत किया। पुरस्कार प्राप्त करने वाले संस्थान छत्तीसगढ़, ओडिशा, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, केरल, तेलंगाना और झारखंड से हैं।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

भुवनेश्वर घोषणा विकसित भारत@2047 की सरकार की व्यापक दृष्टि के अनुरूप है। यह घोषणा भाग लेने वाले संस्थानों और राज्य सरकारों को एक भविष्य-तैयार जनजातीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए सहयोगात्मक रूप से काम करने के लिए प्रतिबद्ध करती है जो भारत की स्वदेशी विरासत को संरक्षित करते हुए साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और समावेशी विकास का समर्थन करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुवनेश्वर घोषणा क्या है?

यह एक रोडमैप है जो जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRI) को उत्कृष्टता केंद्र में बदलने के लिए सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। इसे 9 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में अपनाया गया।

मॉडल TRI फ्रेमवर्क 2030 क्या है?

यह एक प्रस्तावित ढांचा है जो राज्यों में शासन, स्टाफिंग और अनुसंधान गुणवत्ता को मानकीकृत करेगा।

राष्ट्रीय TRI अनुसंधान एजेंडा (2027-2032) का उद्देश्य क्या है?

यह जनजातीय अनुसंधान के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करेगा और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में मदद करेगा।

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