मुख्य तथ्य
शिमला जिले की सबसे बड़ी फल मंडी भट्ठाकुफर में इस वर्ष स्टोन फ्रूट का कारोबार पिछले साल की तुलना में 57.65% गिर गया है। एपीएमसी शिमला-किन्नौर के आंकड़ों के अनुसार, 18 जून 2026 तक मंडी में केवल 3,44,357 पेटियां पहुंची, जबकि 2025 में इसी अवधि में 8,13,033 पेटियां आई थीं। सबसे अधिक नुकसान चेरी का हुआ, जिसकी आवक 90.98% घटकर 29,823 पेटियां रह गई।
मौसम की मार से बागवानी प्रभावित
बागवानों के अनुसार, इस वर्ष कम बर्फबारी और मार्च-अप्रैल में हुई ओलावृष्टि ने स्टोन फ्रूट की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया। एपीएमसी चेयरमैन देवानंद वर्मा ने बताया कि मौसम की वजह से पैदावार में भारी कमी आई, जिससे मंडी में आवक घट गई।
विभिन्न फलों की आवक में गिरावट
- चेरी: 3,30,307 से घटकर 29,823 पेटियां (90.98% गिरावट)
- प्लम: 3,62,290 से घटकर 2,74,893 पेटियां (24.12% गिरावट)
- आड़ू: 11,948 से घटकर 5,643 पेटियां (52.77% गिरावट)
- नेक्ट्रीन: 10,876 से घटकर 3,931 पेटियां (63.86% गिरावट)
- शकरपारा: 36,021 से घटकर 626 पेटियां (98.26% गिरावट)
- बादाम: 23,534 से घटकर 5,039 पेटियां (78.59% गिरावट)
बागवानों और कारोबारियों पर असर
कारोबारियों का कहना है कि उत्पादन में कमी का सीधा असर मंडी के कारोबार पर पड़ा है। सबसे अच्छा दाम देने वाली चेरी की आवक घटने से बागवानों को विशेष नुकसान हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भट्ठाकुफर फल मंडी में स्टोन फ्रूट की आवक कितनी घटी?
18 जून 2026 तक स्टोन फ्रूट की आवक पिछले साल की तुलना में 57.65% घटकर 3,44,357 पेटियां रह गई।
चेरी के उत्पादन में कितनी गिरावट आई?
चेरी की आवक में 90.98% की गिरावट दर्ज की गई, जो 3,30,307 पेटियों से घटकर 29,823 पेटियां रह गई।
इस गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
कम बर्फबारी और मार्च-अप्रैल में ओलावृष्टि के कारण फलों की पैदावार में भारी कमी आई।
किन अन्य फलों की आवक घटी?
शकरपारा 98%, बादाम 78%, नेक्ट्रीन 63%, आड़ू 52% और खुबानी 35% तक घट गई।
Source: www.amarujala.com