मुख्य तथ्य
दक्षिण भारत के तीन राज्यों के किसानों ने अपने पसंदीदा आम की किस्मों के बारे में बताया है। केरल के पालक्काड़ के संकरन नम्बूथिरी, तमिलनाडु के राजापलायम के के.एस. जगनाथा राजा और तेलंगाना के चेवेल्ला की असिया खान ने अपने अनुभव साझा किए।
विस्तार से जानकारी
केरल: संकरन नम्बूथिरी
संकरन नम्बूथिरी के पास 4.5 एकड़ के फार्म में 700 से अधिक किस्में हैं। उनकी पसंदीदा देशी किस्म 'चक्कराकोडायन' है, जो बचपन में खूब खाई जाती थी, लेकिन अब लुप्त हो गई है। वे 'मूर्ति 1' किस्म भी उगाते हैं, जिसका ब्रिक्स स्तर 23 है। उन्होंने केरल की 443 देशी किस्मों की पहचान की है और 22 में से 17 GI टैग वाली किस्मों को संरक्षित किया है।
तमिलनाडु: के.एस. जगनाथा राजा
के.एस. जगनाथा राजा के अनुसार, विरुधुनगर जिले की लाल मिट्टी में उगने वाला 'सप्पट्टाई' आम सबसे मीठा है। उन्होंने 'पंजवर्णम', 'मोहनदास', 'पोटालमा' और 'कोवनकांची' जैसी दुर्लभ किस्मों को ग्राफ्टिंग के जरिए पुनर्जीवित किया है। एक अनाम किस्म की खोज भी की गई है, जिसे जल्द ही नाम दिया जाएगा।
तेलंगाना: असिया खान
असिया खान चेवेल्ला में अपने फार्म पर बेनीशान (बंगनपल्ली), इमाम पसंद, पेड्डा रसालू और चिन्ना रसालू जैसी दक्कन क्षेत्र की किस्में उगाती हैं। वे 'पंचधारा' और 'स्वर्णरेखा' जैसी विरासती किस्मों को संरक्षित कर रही हैं। उनके अनुसार, आम को पानी में भिगोने की परंपरा गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए है।
प्रभाव और महत्व
देशी आम की किस्में लुप्त हो रही हैं, लेकिन किसान उन्हें संरक्षित करने के लिए प्रयासरत हैं। GI टैग और ग्राफ्टिंग जैसी तकनीकों से इन किस्मों को बचाया जा सकता है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
- देशी आम की किस्मों का स्वाद और सुगंध अद्वितीय होता है।
- केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में कई दुर्लभ किस्में उपलब्ध हैं।
- संरक्षण के प्रयासों से भविष्य में ये किस्में बची रह सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दक्षिण भारत में सबसे मीठा आम कौन सा है?
तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले की लाल मिट्टी में उगने वाला सप्पट्टाई आम सबसे मीठा माना जाता है।
केरल की कौन सी आम की किस्में GI टैग प्राप्त हैं?
केरल की कुट्टियाट्टोर किस्म को GI टैग मिला है, जबकि अरूर ओलोर जल्द ही GI टैग पाने वाली है।
क्या देशी आम की किस्में लुप्त हो रही हैं?
हां, केरल और कर्नाटक में कई देशी किस्में लुप्त हो रही हैं, लेकिन किसान उन्हें संरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।
स्रोत: www.thehindu.com