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बेंगलुरु की झीलों में ट्रीटेड पानी भरने से बाढ़ का खतरा, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

मुख्य तथ्य बेंगलुरु में मानसून के आगमन के साथ, झील संरक्षण कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शहर की कई झीलों को ट्रीटेड पानी से भरने से बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता…

मुख्य तथ्य

बेंगलुरु में मानसून के आगमन के साथ, झील संरक्षण कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शहर की कई झीलों को ट्रीटेड पानी से भरने से बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने 2024 की गर्मियों में गंभीर पानी की कमी के बाद भूजल स्तर में सुधार के प्रयास के तहत कई झीलों को सेकेंडरी ट्रीटेड पानी से भरा है।

विस्तृत जानकारी

BWSSB ने अब तक 23 झीलों को भरा है, जिनमें केनगेरी, उल्लाल, मदावरा, हेरोहल्ली, जक्कुर, राचेनहल्ली और अल्लासंद्रा शामिल हैं। इसके अलावा, हेब्बल, नागवारा, डोड्डाबिदरकल्लू, महादेवपुरा, शीलावंता और सदारामंगला सहित 40 अन्य झीलों को भरने का काम चल रहा है।

विशेषज्ञों की चिंता

फेडरेशन ऑफ बेंगलुरु लेक्स के अध्यक्ष वी. रामप्रसाद ने कहा, “इससे झीलों की जलग्रहण क्षमता कम हो गई है। आने वाले बारिश के पानी के लिए कोई जगह नहीं है। इसके अलावा, इनमें से किसी भी झील में स्लूइस गेट नहीं हैं, जिससे अधिकारी जल स्तर को नियंत्रित नहीं कर सकते। इससे स्थानीय बाढ़ आ सकती है।”

एक्शनएड से जुड़े केनगेरी निवासी राघवेंद्र पाचापुरे ने कहा कि कई झीलें अपने प्राकृतिक चक्र के विपरीत साल भर भरी रहती हैं। उन्होंने कहा, “हमने झीलों को मानव-केंद्रित तरीके से देखना शुरू कर दिया है और उन्हें भूजल पुनर्भरण के उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। यह झीलों की जैव विविधता के लिए अच्छा नहीं है।”

प्रभाव और सरकारी प्रयास

2022 में महादेवपुरा और के.आर. पुरम में बाढ़ के बाद, तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने झीलों में स्लूइस गेट लगाने के लिए 35 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन यह परियोजना आगे नहीं बढ़ी। बाद में, बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) ने 2023 में 102 झीलों पर स्लूइस गेट लगाने के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की, लेकिन वह भी आगे नहीं बढ़ी।

एक वरिष्ठ नागरिक अधिकारी ने कहा कि विश्व बैंक ऋण से वित्तपोषित जलवायु लचीलापन परियोजना के हिस्से के रूप में स्लूइस गेट लगाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इनलेट और आउटलेट के बीच एक ग्रेडिएंट बनाए रखा जा रहा है, जिससे बाढ़ को रोका जा सकेगा।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

  • बेंगलुरु की झीलों में ट्रीटेड पानी भरने से मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
  • अधिकांश झीलों में स्लूइस गेट नहीं हैं, जिससे जल स्तर प्रबंधन मुश्किल है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि झीलों को प्राकृतिक चक्र के अनुसार छोड़ा जाना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु में कितनी झीलों में ट्रीटेड पानी भरा गया है?

BWSSB ने अब तक 23 झीलों में ट्रीटेड पानी भरा है, और 40 और झीलों को भरने का काम जारी है।

झीलों में ट्रीटेड पानी भरने से क्या समस्या हो सकती है?

इससे झीलों की जलग्रहण क्षमता कम हो गई है, जिससे मानसून में भारी बारिश के दौरान स्थानीय बाढ़ आ सकती है।

क्या झीलों में स्लूइस गेट लगाए गए हैं?

नहीं, अधिकांश झीलों में स्लूइस गेट नहीं हैं, जिससे जल स्तर को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। 2022 में 35 करोड़ रुपये की योजना बनी थी लेकिन वह आगे नहीं बढ़ी।

स्रोत: www.thehindu.com

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