प्रमुख तथ्य
बेंगलुरु के बागलूर क्षेत्र में 12 वर्षीय प्रवासी बालक अरिफुल इस्लाम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (KSCPCR) में हत्या, पुलिस की निष्क्रियता और आरोपियों द्वारा धमकाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है।
पूरी घटना
असम के मूल निवासी नूर बख्तियार मियां ने अपने परिवार के साथ हाल ही में बेंगलुरु में काम की तलाश में प्रवास किया था। 4 जून को उनके बेटे अरिफुल की मौत हो गई। शिकायत के अनुसार, बेल्लाहल्ली में परिवार के निवास के पीछे रहने वाले लोगों ने अरिफुल को एक टंकी से पानी निकालने के लिए मजबूर किया। जब बालक ने मना किया, तो आरोपियों ने उसे टंकी में धकेल दिया और पानी का पंप चालू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि टंकी का ढक्कन बंद कर दिया गया, जिससे बच्चे की मौत हो गई। अरिफुल का नौ वर्षीय भाई शरीफुल इस्लाम पूरी घटना का चश्मदीद है।
शरीफुल के सूचना देने पर परिजन मौके पर पहुंचे और अरिफुल को टंकी में उल्टा तैरता पाया। उन्होंने उसे नजदीकी क्लिनिक और फिर सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस पर आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि बागलूर पुलिस स्टेशन के कर्मियों ने शोकाकुल परिवार के साथ असंवेदनशील व्यवहार किया और उन्हें बार-बार 'बांग्लादेशी' और 'अवैध प्रवासी' कहा। शिकायत में कहा गया कि पुलिस ने अपशब्दों का प्रयोग किया, केस आगे बढ़ाने से हतोत्साहित किया और जल्दी दफनाने का दबाव डाला। इसके अलावा, पुलिस ने नूर के बहनोई अपिस इस्लाम को स्पॉट महाजर की वीडियो बनाने पर पीटा और उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया।
FIR और आरोपी
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 और 3(5) तथा बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 14 के तहत FIR दर्ज की। हालांकि, परिजनों का कहना है कि बाल श्रम की धारा जोड़ना गलत है और यह जानबूझकर हत्या के मामले से ध्यान भटकाता है। शिकायत में सैयद इमरान अली, गौसिया परवीन और उनकी बेटी सानिया अली को आरोपी बनाया गया है। परिजनों का आरोप है कि सैयद इमरान अली ने बच्चे से जबरन काम कराया और मना करने पर हिंसा की। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद बिना गिरफ्तारी के छोड़ दिया।
धमकी और सुरक्षा की मांग
5 जून को अंतिम संस्कार के बाद, आरोपियों के स्थानी गुंडे और सहयोगी परिवार के घर में घुस आए, उन्हें समझौता करने का दबाव डाला, पैसे की पेशकश की और दस्तावेजों पर अंगूठा लगवाने का प्रयास किया। सुरक्षा के डर से परिवार बेल्लाहल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी में स्थानांतरित हो गया।
परिवार ने KSCPCR से 9 वर्षीय शरीफुल इस्लाम की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है, जो अपने भाई की मौत का चश्मदीद है और गंभीर मनोवैज्ञानिक आघात से जूझ रहा है। साथ ही, त्वरित जांच, केस से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां, पुलिस सुरक्षा और आयोग द्वारा जांच की स्वतंत्र निगरानी की मांग की गई है। परिवार का कहना है कि भाषा की बाधा और प्रवासी मजदूर होने के कारण उनके साथ भेदभाव हुआ और न्याय से वंचित रखा गया।
आगे की कार्रवाई
KSCPCR ने अभी तक इस शिकायत पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बागलूर में 12 वर्षीय बालक की मौत कैसे हुई?
आरोप है कि पड़ोसियों ने बालक को पानी की टंकी से पानी निकालने के लिए मजबूर किया, और इनकार करने पर उसे टंकी में धकेल कर पंप चालू कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें 'बांग्लादेशी' और 'अवैध प्रवासी' कहकर अपमानित किया, केस दर्ज करने से हतोत्साहित किया, और जल्दी दफनाने का दबाव डाला।
इस मामले में किन धाराओं में FIR दर्ज हुई है?
FIR भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 और 3(5) तथा बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 14 के तहत दर्ज की गई है।
परिवार ने आयोग से क्या मांग की है?
परिवार ने चश्मदीद 9 वर्षीय बालक की सुरक्षा, त्वरित जांच, पुलिस सुरक्षा, और मामले की स्वतंत्र निगरानी की मांग की है।