प्रमुख तथ्य
असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने चिरांग जिले के सिडली इलाके में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन में 9 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और 8 दुर्लभ गोल्डन लंगूरों को बचाया गया, हालांकि एक लंगूर मृत पाया गया।
ऑपरेशन का विवरण
गुप्त सूचना के आधार पर, गुवाहाटी से एसटीएफ की टीम ने सिडली पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी की मदद से नेशनल हाईवे-27 पर देर रात छापेमारी की। इस दौरान एक महिंद्रा स्कॉर्पियो (WB 06 Q 3755) और एक टाटा नैनो (AS 26 A 5190) को रोका गया। वाहनों की तलाशी में 8 गोल्डन लंगूर बरामद हुए, जिनमें से एक मृत था।
गिरफ्तार तस्कर और नेटवर्क
गिरफ्तार किए गए 9 लोगों में एक बांग्लादेशी नागरिक, पांच पश्चिम बंगाल और तीन असम के निवासी शामिल हैं। यह अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का संकेत है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये लंगूर चिरांग जिले के नवगठित चिकना ज्व्हलाओ नेशनल पार्क से अवैध रूप से पकड़े गए थे। स्थानीय अतिक्रमणकारियों द्वारा जंगलों को नष्ट करने के बाद इन जानवरों को तस्करों को बेचे जाने की आशंका है।
प्रभाव और आगे की कार्रवाई
बचाए गए लंगूरों को वन विभाग को सौंप दिया गया है, जहां उनकी देखभाल और पुनर्वास किया जाएगा। गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ जारी है ताकि तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि आगे की कार्रवाई जारी है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह घटना संगठित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के बढ़ते खतरे को उजागर करती है। गोल्डन लंगूर भारत के सबसे लुप्तप्राय प्राइमेट्स में से एक हैं, जो केवल असम के कुछ इलाकों में पाए जाते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए कड़े संरक्षण उपायों की आवश्यकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- गोल्डन लंगूर क्यों खास हैं? गोल्डन लंगूर भारत के सबसे लुप्तप्राय प्राइमेट्स में से एक हैं, जो केवल असम के कुछ इलाकों में पाए जाते हैं।
- तस्करी में कितने लोग शामिल थे? इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक बांग्लादेशी, पांच पश्चिम बंगाल और तीन असम के निवासी शामिल हैं।
- बचाए गए लंगूरों का क्या हुआ? बचाए गए लंगूरों को वन विभाग को सौंप दिया गया है, जहां उनकी देखभाल और पुनर्वास किया जाएगा।
स्रोत: www.ndtv.com