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असम में तीन से अधिक बच्चों वाली महिलाओं को नहीं मिलेगी मुफ्त डायग्नोस्टिक सेवा

मुख्य तथ्य असम के बारपेटा जिले के एक सरकारी अस्पताल ने तीन से अधिक बच्चों वाली या चौथी संतान की उम्मीद कर रही महिलाओं के लिए मुफ्त डायग्नोस्टिक सेवाएं बंद करने का फैसला किया है।…

मुख्य तथ्य

असम के बारपेटा जिले के एक सरकारी अस्पताल ने तीन से अधिक बच्चों वाली या चौथी संतान की उम्मीद कर रही महिलाओं के लिए मुफ्त डायग्नोस्टिक सेवाएं बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा।

राज्य विधानसभा अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने सोमवार (22 जून 2026) को यह घोषणा की। वे बारपेटा रोड स्थित प्रथम रेफरल इकाई (FRU) के प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल से पूरे राज्य में इसी तरह की नीति लागू करने का अनुरोध किया है।

विस्तार से जानकारी

FRU में आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन की स्थापना के बाद दास ने कहा कि प्रबंधन समिति ने तीन से अधिक बच्चों वाली या चौथी संतान की उम्मीद कर रही महिलाओं को मुफ्त सेवाएं नहीं देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, "अन्यथा हमारी जनसंख्या नीति विफल हो जाएगी।"

दास ने यह भी कहा, "मैंने स्वास्थ्य मंत्री से अनुरोध किया है कि वे पूरे असम में ऐसी महिलाओं के लिए मुफ्त चिकित्सा जांच और अन्य सेवाओं को समाप्त करने की नीति लाएं।"

पृष्ठभूमि: जनसंख्या नीति में संशोधन

दिसंबर 2025 में, असम सरकार ने 2017 की जनसंख्या और महिला सशक्तिकरण नीति में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इस संशोधन का उद्देश्य सरकारी नौकरियों, स्वयं सहायता समूहों और चुनावी भागीदारी के लिए दो बच्चों के मानदंड को सुदृढ़ करना था।

हालांकि, 2025 के संशोधन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, चाय बागान जनजाति, मातक और मोरान समुदायों को तीन बच्चों तक की छूट दी गई है। ये समुदाय सरकारी नौकरियों, लाभों और पंचायत-नगर निकाय चुनाव लड़ने की पात्रता नहीं खोएंगे।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 5 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि यह नीति जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने, मातृ स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और बाल विवाह को खत्म करने के लिए है।

प्रभाव और आगे की राह

यह निर्णय राज्य की जनसंख्या नीति को लागू करने की दिशा में एक कठोर कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गरीब और वंचित वर्गों की महिलाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिनके पास निजी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नहीं है।

हालांकि, सरकार का तर्क है कि यह दीर्घकालिक जनसंख्या नियंत्रण और संसाधनों के बेहतर आवंटन के लिए आवश्यक है। अब यह देखना होगा कि क्या स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल राज्यव्यापी नीति लागू करते हैं या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम सरकार ने यह निर्णय क्यों लिया?

जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने, मातृ स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और बाल विवाह को खत्म करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

क्या यह नियम सभी महिलाओं पर लागू होगा?

नहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, चाय बागान जनजाति, मातक और मोरान समुदायों को तीन बच्चों तक की छूट दी गई है।

यह नीति कब से लागू होगी?

बारपेटा रोड के FRU में यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होगा, जबकि राज्यव्यापी नीति पर विचार किया जा रहा है।

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