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20 tmc सांसदों का बिना किसी सांसद वाली पार्टी में विलय: संवैधानिक पहेली

प्रमुख तथ्य तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सूचित किया कि वे नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए हैं, जिसके पास देश…

प्रमुख तथ्य

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सूचित किया कि वे नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए हैं, जिसके पास देश में एक भी सीट नहीं है। इस कदम ने दलबदल विरोधी कानून के तहत विलय के अपवाद को लेकर एक नई कानूनी बहस छेड़ दी है। यह इस साल की दूसरी घटना है जब सांसदों के एक समूह ने ऐसा दावा किया है; इससे पहले अप्रैल में आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने भी ऐसा ही कदम उठाया था।

विस्तार से जानकारी

बागी सांसदों में यूसुफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार और सुखेंदु रे शामिल हैं। ये सभी TMC नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। रविवार को 19 सांसदों ने व्यक्तिगत रूप से अपने पत्र स्पीकर को सौंपे, जबकि 20वीं सांसद रचना बनर्जी ने मलेशिया से अपनी सहमति भेजी। उन्होंने दावा किया कि वे NCPI में विलय कर चुके हैं, जो 2022 में पंजीकृत एक पार्टी है और जिसका कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है।

दलबदल विरोधी कानून क्या कहता है

भारत का दलबदल विरोधी कानून संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत 1985 में लागू हुआ था। यह किसी भी विधायक को अयोग्य ठहराता है यदि वह स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या पार्टी के निर्देश के विरुद्ध मतदान करता है। कानून में केवल एक अपवाद है: विलय। पैराग्राफ 4 के अनुसार, यदि मूल राजनीतिक दल किसी अन्य पार्टी में विलय करता है और उस दल के विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य इस विलय से सहमत होते हैं, तो अयोग्यता लागू नहीं होगी। हालांकि, कानून की भाषा से पता चलता है कि विलय का निर्णय पार्टी स्तर पर होना चाहिए, न कि केवल विधायकों द्वारा।

कानूनी विवाद

मुख्य प्रश्न यह है कि क्या पैराग्राफ 4 के तहत विलय के लिए मूल राजनीतिक दल का निर्णय आवश्यक है, या केवल दो-तिहाई विधायकों का समर्थन पर्याप्त है? सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में महाराष्ट्र राजनीतिक संकट के मामले में स्पष्ट किया था कि विधायक दल राजनीतिक दल से स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर सकता। हालांकि, 2022 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोवा में एक विलय को बरकरार रखा था, जिसमें केवल दो-तिहाई विधायकों के समर्थन को पर्याप्त माना गया था। यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

प्रभाव

यदि विलय स्वीकार हो जाता है, तो लोकसभा में TMC की सीटें 28 से घटकर 8 रह जाएंगी, जबकि NDA की सीटें 294 से बढ़कर 314 हो जाएंगी। राज्यसभा में TMC की सीटें पहले ही 13 से घटकर 10 हो चुकी हैं। TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को पत्र लिखकर तर्क दिया है कि दसवीं अनुसूची के तहत विभाजन अब उपलब्ध नहीं है और TMC एक अविभाज्य राजनीतिक दल है। वरिष्ठ वकील और सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, "TMC विधायक दल के बागी किसी राजनीतिक दल में विलय नहीं कर सकते; ऐसा केवल तभी हो सकता है जब TMC स्वयं ऐसा चाहे। उन्हें अयोग्य ठहराया जाए।"

आगे क्या

अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विलय के दावे की जांच करनी है। वे सांसदों के हस्ताक्षर सत्यापित करेंगे और तय करेंगे कि यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं। जब तक कोई फैसला नहीं आता, बागी सांसद कानूनी रूप से अस्पष्ट स्थिति में हैं: वे कागजी तौर पर अभी भी TMC के सदस्य हैं और TMC के व्हिप के अधीन हैं। यदि वे इसके विरुद्ध मतदान करते हैं, तो उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है।

FAQ

  • क्या 20 TMC सांसदों का विलय वैध है? यह कानूनी रूप से विवादित है। दलबदल विरोधी कानून के अनुसार, विलय के लिए मूल पार्टी का निर्णय आवश्यक है, जबकि बागी सांसदों का तर्क है कि दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन पर्याप्त है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबित है।
  • NCPI क्या है? नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) एक छोटी पार्टी है जो 2022 में पंजीकृत हुई और 2023 में चुनाव लड़ी, लेकिन इसका कोई निर्वाचित सांसद नहीं है।
  • इस विलय का TMC पर क्या प्रभाव पड़ेगा? यदि विलय स्वीकार हो जाता है, तो लोकसभा में TMC की सीटें 28 से घटकर 8 रह जाएंगी, जबकि NDA की सीटें 294 से बढ़कर 314 हो जाएंगी।
  • स्पीकर की भूमिका क्या है? लोकसभा स्पीकर ओम बिरला विलय के दावे की जांच करेंगे और तय करेंगे कि यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।
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