प्रमुख तथ्य
आंध्र प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। आयोग के अध्यक्ष वेतुकुरी सूर्यनारायण राजू ने शनिवार (13 जून 2026) को विजयनगरम में यह बात कही।
सिफारिश का विवरण
राजू ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए, क्योंकि इन प्लेटफॉर्म पर अनुपयोगी सामग्री उपलब्ध होने से उनके मन में अशांति पैदा हो सकती है। आयोग ने राज्य सरकार से 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून बनाने की सिफारिश की है।
आयोग ने शिक्षा मंत्री नारा लोकेश को एक नोट सौंपा है, जिसमें बच्चों को अश्लील सामग्री और अन्य हानिकारक चीजों से बचाने के लिए एक विशेष कानून बनाने की संभावनाओं का अध्ययन करने का अनुरोध किया गया है।
माता-पिता के लिए सलाह
राजू ने माता-पिता से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों द्वारा उपयोग किए जाने वाले स्मार्टफोन की जांच करें और उन्हें सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के बारे में मार्गदर्शन दें, जो उन्हें अजनबियों के संपर्क में ला सकता है। उन्होंने कहा कि किशोरों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा और करियर पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि सोशल मीडिया प्रभावितों और अजनबियों के जाल में फंसना चाहिए।
प्रभाव और आगे की राह
यह सिफारिश बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि राज्य सरकार इस पर अमल करती है, तो आंध्र प्रदेश ऐसा कानून बनाने वाला पहला राज्य बन सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आंध्र प्रदेश बाल अधिकार आयोग ने क्या सिफारिश की है?
आयोग ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने की सिफारिश की है।
यह सिफारिश किसने और कब की?
आयोग के अध्यक्ष वेतुकुरी सूर्यनारायण राजू ने 13 जून 2026 को विजयनगरम में यह सिफारिश की।
माता-पिता के लिए क्या सलाह दी गई है?
माता-पिता को अपने बच्चों के स्मार्टफोन की जांच करने और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के बारे में मार्गदर्शन करने को कहा गया है।
Source: www.thehindu.com