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गृह मंत्री अमित शाह ने जनसांख्यिकी परिवर्तन पैनल की कार्यप्रगति की समीक्षा की

मुख्य बातें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारकों के कारण देश में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की कार्यप्रगति की…

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारकों के कारण देश में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की कार्यप्रगति की समीक्षा की। बैठक में गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो प्रमुख तपन डेका और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

विस्तृत जानकारी

गृह मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि समिति को सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जाए, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा, आवश्यक दस्तावेजों तक पहुंच और राज्य सरकारों के साथ समन्वय शामिल है। समिति का गठन 26 मई 2026 को किया गया था और इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रभाकर नाओलेकर कर रहे हैं। अन्य सदस्यों में जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री शमिका रवि शामिल हैं।

प्रभाव और महत्व

गृह मंत्रालय के अनुसार, समिति अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारकों के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का वैज्ञानिक आकलन करेगी, उनके कारणों का विश्लेषण करेगी और उपयुक्त नीतिगत, विधायी और प्रशासनिक उपायों की सिफारिश करेगी। समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

यह समिति न केवल सीमावर्ती जिलों बल्कि महानगरीय क्षेत्रों, औद्योगिक गलियारों, आदिवासी क्षेत्रों और अन्य सामाजिक-आर्थिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच करेगी। इसका उद्देश्य अवैध प्रवासन और जनसंख्या असंतुलन से संबंधित मुद्दों पर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस उच्चस्तरीय समिति का गठन क्यों किया गया?

समिति का गठन अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से देश में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का व्यापक आकलन करने और समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करने के लिए किया गया।

समिति का अध्यक्ष कौन है?

समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रभाकर नाओलेकर कर रहे हैं।

समिति को अपनी रिपोर्ट कब तक सौंपनी है?

समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

समिति किन क्षेत्रों का दौरा करेगी?

समिति सीमावर्ती जिलों, महानगरीय क्षेत्रों और औद्योगिक शहरों का दौरा करेगी।

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