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Amit Shah: 2027 तक पूर्वोत्तर से AFSPA हटेगा, सिर्फ एक-दो राज्यों में रहेगा

मुख्य बातें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (12 जून, 2026) को घोषणा की कि अगले वर्ष (2027) तक पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्यों से AFSPA (सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम) हटा लिया जाएगा। केवल…

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (12 जून, 2026) को घोषणा की कि अगले वर्ष (2027) तक पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्यों से AFSPA (सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम) हटा लिया जाएगा। केवल एक-दो राज्यों में ही यह कानून लागू रहेगा। यह बात उन्होंने नई दिल्ली में असम और नागालैंड के बीच सीमा विवाद वाले क्षेत्र में तेल एवं खनिज अन्वेषण के लिए त्रिपक्षीय समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर के अवसर पर कही।

AFSPA हटाने की प्रक्रिया

शाह ने कहा, "मुझे विश्वास है कि एक-दो राज्यों को छोड़कर, हम अगले साल पूरे पूर्वोत्तर से AFSPA वापस ले लेंगे।" उन्होंने बताया कि AFSPA के दायरे में कमी शांति का संकेत है। 2019 से अब तक 12 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में हिंसा की घटनाओं में लगभग 80% की कमी आई है।

असम-नागालैंड समझौता: ऐतिहासिक कदम

शाह ने इस समझौते को "ऐतिहासिक" बताते हुए कहा कि इसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित पूर्वोत्तर के विज़न में अंतिम बाधा को दूर कर दिया है। यह समझौता असम-नागालैंड सीमा पर विवादित क्षेत्र (DAB) में तेल और खनिज अन्वेषण की सुविधा प्रदान करेगा। तीन दशकों से अधिक समय से क्षेत्राधिकार संबंधी मतभेदों के कारण यहां अन्वेषण गतिविधियां ठप थीं।

आर्थिक और ऊर्जा लाभ

शाह ने कहा, "इससे पूर्वोत्तर में खनिज अन्वेषण के नए रास्ते खुलेंगे। इस क्षेत्र में न केवल तेल और गैस है, बल्कि भारी खनिज भंडार भी हैं, जिनका कानून-व्यवस्था की समस्याओं के कारण दोहन नहीं हो सका।" उन्होंने बताया कि एक MoU से ही निष्कर्षण क्षमता 1,000-1,500 बैरल प्रतिदिन से 10 गुना बढ़ाई जा सकती है। "अकेले एक क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की संभावना है। यदि हम नागालैंड में फैले तेल भंडार निकालें, तो हम अपनी तेल जरूरतों के लिए विदेशी देशों पर निर्भरता कम कर सकते हैं।"

सहकारी संघवाद की मिसाल

शाह ने इस समझौते को सहकारी संघवाद का सर्वोत्तम उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, "असम और नागालैंड दोनों का विकास लंबे समय तक बाधित रहा क्योंकि MoU पर सहमति नहीं बन पाई थी। आज जो रास्ता खुला है, वह दोनों राज्यों के विकास के द्वार खोलेगा।"

समझौते का विवरण

यह समझौता असम-नागालैंड सीमा पर 1,000 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र में अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों को सुविधाजनक बनाएगा। असम सरकार के बयान के अनुसार, इस क्षेत्र में पर्याप्त ऊर्जा और खनिज भंडार होने का अनुमान है। समझौते पर शाह, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

FAQ

AFSPA क्या है और इसे क्यों हटाया जा रहा है?

AFSPA (Armed Forces Special Powers Act) एक विशेष अधिनियम है जो सेना को विशेष अधिकार देता है। सरकार का मानना है कि पूर्वोत्तर में शांति स्थापित होने के कारण इसे हटाया जा सकता है।

असम-नागालैंड समझौते से क्या लाभ होगा?

इस समझौते से 1,000 वर्ग किमी क्षेत्र में तेल और खनिज अन्वेषण को बढ़ावा मिलेगा, उत्पादन क्षमता 10 गुना बढ़ेगी और 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली संभव है।

पूर्वोत्तर में हिंसा में कितनी कमी आई है?

2019 से अब तक 12 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिससे हिंसा की घटनाओं में लगभग 80% की कमी आई है।

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