Desh Duniya | Ambedkar statue vandalism

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में बाबा साहेब आंबेडकर की प्रतिमा तोड़ने का मामला, विरोध प्रदर्शन जारी

घटना का विवरण उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के जाजौली और आसपास के गांवों में शुक्रवार (19 जून, 2026) की सुबह डॉ. बी. आर. आंबेडकर की एक प्रतिमा को अज्ञात बदमाशों ने तोड़ दिया। इस…

घटना का विवरण

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के जाजौली और आसपास के गांवों में शुक्रवार (19 जून, 2026) की सुबह डॉ. बी. आर. आंबेडकर की एक प्रतिमा को अज्ञात बदमाशों ने तोड़ दिया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव व्याप्त हो गया। अधिकांश दलित समुदाय के ग्रामीणों ने प्रतिमा स्थल पर धरना देकर नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रतिमा को पुनः स्थापित किया और प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत कराया। अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया और कहा कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। कौशांबी के सर्किल ऑफिसर (CO) जनेश्वर प्रसाद पांडेय ने कहा, “वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र के इस स्थल का निरीक्षण किया है। अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच जारी है। प्रतिमा को पुनः स्थापित कर दिया गया है और हम दोषियों की जल्द गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत हैं।” पुलिस सीसीटीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इस घटना को सामंती ताकतों की साजिश करार दिया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा, “यह तोड़फोड़ हाशिए के समुदायों को संदेश देने के लिए है कि दलितों और अन्य वंचितों के प्रतीकों और गरिमा को दबाया जाएगा। बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश में आंबेडकर की प्रतिमाओं पर हमले कोई नई बात नहीं हैं। बीजेपी के उदय और उसकी विभाजनकारी राजनीति ने सामंती तत्वों को प्रोत्साहित किया है, जो बहुजनों को कोने में धकेलना चाहते हैं।” गाजीपुर से सांसद और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अफजाल अंसारी ने कहा, “ऐसी घटनाएं राज्य में नियमित रूप से हो रही हैं और दलितों को हतोत्साहित करने के लिए हैं। ये बीजेपी द्वारा फैलाई गई नफरत और सामंती तत्वों के दबाव का परिणाम हैं। गाजीपुर में तीन बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। सामंती तत्व आंबेडकर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाकर दलितों को भावनात्मक रूप से आघात पहुंचाते हैं। बीजेपी सरकार के तहत ये तत्व और उद्दंड हो गए हैं।”

प्रभाव और आगे की राह

इस घटना ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में दलित प्रतीकों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय के मुद्दे को उजागर किया है। स्थानीय प्रशासन ने शांति बनाए रखने का प्रयास किया है, लेकिन विपक्षी दलों ने सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

कौशांबी में आंबेडकर की प्रतिमा कब तोड़ी गई?

यह घटना 19 जून 2026 की सुबह हुई।

विरोध प्रदर्शन किसने किया?

जाजौली और आसपास के गांवों के दलित समुदाय के लोगों ने सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया।

पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

पुलिस ने प्रतिमा को पुनः स्थापित किया और आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। मामला दर्ज कर लिया गया है।

विपक्षी दलों ने क्या आरोप लगाए?

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी की नफरत की राजनीति और सामंती ताकतों के प्रोत्साहन के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

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