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अकाल तख्त ने पंजाब के cm भगवंत मान को घोषित किया ‘गुरु द्रोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’

मुख्य तथ्य अमृतसर स्थित अकाल तख्त — सिखों की सर्वोच्च अस्थायी सीट — ने सोमवार (15 जून 2026) को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु द्रोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया। यह…

मुख्य तथ्य

अमृतसर स्थित अकाल तख्त — सिखों की सर्वोच्च अस्थायी सीट — ने सोमवार (15 जून 2026) को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु द्रोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित कर दिया। यह घोषणा एक कथित आपत्तिजनक वीडियो के संबंध में झूठ बोलने के आरोप में की गई।

पूरा मामला

अकाल तख्त के जत्थेदार गियानी कुलदीप सिंह गर्गज ने 'फसील' (अकाल तख्त का मंच) से यह आदेश सुनाया, जो पंज सिंह साहिबान (सिख पादरी) की बैठक के बाद आया। गर्गज ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो — जिसमें भगवंत मान जैसा दिखने वाला व्यक्ति है — को दो फोरेंसिक प्रयोगशालाओं द्वारा 'प्रामाणिक' पाया गया। उन्होंने कहा कि वीडियो न तो छेड़छाड़ किया गया है और न ही AI-जनरेटेड है।

गर्गज ने आगे बताया कि अकाल तख्त सचिवालय ने जनवरी में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था, जब मान ने वीडियो की फोरेंसिक जांच कराने की बात कही थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद सचिवालय ने दो लैबों से जांच कराई।

"मुख्यमंत्री का पद सम्मानजनक है। लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह [मान] ने अकाल तख्त पर झूठ बोला," गर्गज ने आरोप लगाया।

पंज सिंह साहिबान ने मुख्यमंत्री को 'गुरु द्रोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया, जैसा कि गर्गज ने सिखों की सर्वोच्च अस्थायी सीट के मंच से कहा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला जनवरी 2026 में शुरू हुआ, जब अकाल तख्त ने मान को 'गुरु की गोलक' (गुरुद्वारा दान पेटी) पर टिप्पणी करने और कुछ वीडियो क्लिप्स में 'सिख गुरुओं' और शहीद जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ 'आपत्तिजनक गतिविधियों' में शामिल होने के आरोप में तलब किया था। मान 15 जनवरी 2026 को अमृतसर में सचिवालय के सामने पेश हुए और उन्होंने दावा किया कि वीडियो फर्जी या AI-जनरेटेड है, और 'सिंह साहिबान' किसी भी लैब से इसकी जांच करा सकते हैं।

एंटी-सैक्रिलेज कानून पर विवाद

अकाल तख्त ने सभी सिख विधायकों (दलगत संबद्धता से परे) और पंजाब कैबिनेट को 29 जून 2026 को तख्त के सामने पेश होने का आदेश दिया है, जो जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 से संबंधित है। अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने पहले इस कानून पर आपत्ति जताई थी, कहा था कि इसे सिख पंथ से परामर्श किए बिना बनाया गया। अकाल तख्त ने राज्य सरकार से कानून के उन प्रावधानों को हटाने को कहा था जो 'गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और संगत की भावनाओं के विरुद्ध' हैं। उल्लेखनीय है कि यह विधेयक 13 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ था, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के लिए आजीवन कारावास तक की सख्त सजा का प्रावधान है।

आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया

अकाल तख्त की घोषणा से कुछ देर पहले, AAP पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज सिंह पन्नू ने कहा कि लैब रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कौन है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गर्गज राजनीतिक हो गए हैं और उन्होंने एक पक्ष चुन लिया है। पन्नू ने जोर देकर कहा कि अकाल तख्त साहिब पूरे सिख समुदाय का तख्त है, न कि किसी एक पार्टी का।

FAQ

अकाल तख्त ने भगवंत मान को 'गुरु द्रोखी' क्यों घोषित किया?

अकाल तख्त के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक विवादित वीडियो के संबंध में झूठ बोला। दो फोरेंसिक लैबों ने वीडियो को प्रामाणिक पाया, जिसके बाद पंज सिंह साहिबान ने यह घोषणा की।

क्या है वह विवादित वीडियो?

वीडियो में कथित तौर पर भगवंत मान जैसा दिखने वाला व्यक्ति 'गुरु की गोलक' पर टिप्पणी करता है और सिख गुरुओं व जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक गतिविधियों में लिप्त दिखता है।

अकाल तख्त ने आगे क्या कार्रवाई की है?

अकाल तख्त ने सभी सिख विधायकों और पंजाब कैबिनेट को 29 जून 2026 को तख्त के सामने पेश होने का आदेश दिया है, जो एंटी-सैक्रिलेज कानून से संबंधित है।

आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया क्या है?

AAP पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज सिंह पन्नू ने कहा कि लैब रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में व्यक्ति भगवंत मान ही हैं, और उन्होंने जत्थेदार पर राजनीतिक पक्ष लेने का आरोप लगाया।

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