प्रमुख तथ्य
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी मंगलवार (16 जून 2026) को पश्चिम बंगाल के अपराध अन्वेषण विभाग (CID) के सामने पेश हुए। यह पूछताछ विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित भड़काऊ बयानों को लेकर दर्ज मामले में हुई।
इससे पहले, रविवार (14 जून) और सोमवार (15 जून) को बनर्जी से CID और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अलग-अलग मामलों में लंबी पूछताछ की थी। रविवार को CID ने विधायकों के हस्ताक्षर जालसाजी मामले में और सोमवार को ED ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में पूछताछ की थी। गुरुवार (11 जून) को भी CID ने हस्ताक्षर जालसाजी मामले में उनसे पूछताछ की थी।
मामले की पृष्ठभूमि
बनर्जी के खिलाफ भड़काऊ बयानों का मामला ठीक एक माह पहले दर्ज किया गया था। यह FIR सामाजिक कार्यकर्ता राजीब सरकार की शिकायत पर 5 मई 2026 को उत्तर 24 परगना जिले के बागुईआटी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी। यह शिकायत विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के एक दिन बाद दर्ज की गई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि बनर्जी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा और मतगणना प्रक्रिया पर भड़काऊ टिप्पणियां कीं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने दावा किया कि बनर्जी की टिप्पणियां उत्तेजक थीं और इनका संबंध चुनाव प्रक्रिया से था।
कानूनी प्रावधान
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने बनर्जी पर 27 अप्रैल से 3 मई के बीच कई चुनावी कार्यक्रमों में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया।
अधिकारी ने कहा, "उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक सभाओं में दिए गए कुछ बयान उत्तेजक प्रकृति के थे और इनमें सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करने की क्षमता थी।"
प्रभाव और आगे की कार्रवाई
यह मामला पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद बढ़े राजनीतिक तनाव को दर्शाता है। CID लगातार बनर्जी से पूछताछ कर रही है, जो TMC के वरिष्ठ नेता हैं। अब तक तीन अलग-अलग मामलों में उनसे पूछताछ हो चुकी है।
FAQ
अभिषेक बनर्जी से CID क्यों पूछताछ कर रही है?
उनके खिलाफ चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ बयान देने का मामला दर्ज है, जिसमें CID जांच कर रही है।
यह मामला कब दर्ज हुआ?
यह FIR 5 मई 2026 को बागुईआटी थाने में दर्ज की गई थी।
अभिषेक बनर्जी पर क्या आरोप हैं?
उन पर आरोप है कि उन्होंने 27 अप्रैल से 3 मई के बीच चुनावी सभाओं में भड़काऊ भाषण दिए, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ सकता था।