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Ncpi: वह पार्टी जिसमें 20 tmc सांसदों ने किया विलय, त्रिपुरा चुनाव में ‘बदमाशों को नकारो’ का नारा देती थी

प्रमुख तथ्य लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने रविवार को नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा की। यह पार्टी त्रिपुरा-आधारित है और इसका कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं…

प्रमुख तथ्य

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने रविवार को नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा की। यह पार्टी त्रिपुरा-आधारित है और इसका कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है। विलय के बाद ये सांसद भाजपा-नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करेंगे।

पूरी खबर

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। कम से कम 58 विधायकों ने विद्रोह कर दिया है और पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक अलग गुट बना लिया है, जिसमें निष्कासित नेता रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना गया है।

लोकसभा में, 20 बागी सांसदों ने NCPI में विलय कर लिया। इनमें काकोली घोष दस्तीदार, पूर्व फ्लोर लीडर सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, अभिनेता दीपक अधिकारी, सायोनी घोष, जून मालिया, पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान और पूर्व फुटबॉल कप्तान प्रसून बनर्जी शामिल हैं।

NCPI के बारे में जानकारी

NCPI एक अपेक्षाकृत अज्ञात पार्टी है, जिसका पंजीकरण 2022 में हुआ था। इसने आखिरी बार 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें इसने चार सीटों (चवामनु, अम्बासा, करमचरा और कैलाशहर) पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, इसके उम्मीदवार NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं) से भी पीछे रहे थे।

पार्टी का चुनाव चिन्ह 'पेन निब' (कलम की नोक) है, जो इसे एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (RUPP) के रूप में आवंटित किया गया था। RUPP वे पार्टियां हैं जो चुनाव आयोग में पंजीकृत हैं लेकिन राज्य या राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए आवश्यक वोट प्रतिशत नहीं जुटा पाई हैं।

त्रिपुरा चुनाव के दौरान NCPI का नारा था: "अपने अधिकारों को बचाने के लिए, राजनीतिक बदमाशों को नकारें। राजनीतिक हस्तियों के बजाय समाजसेवियों का समर्थन करें।" यही नारा अब तब चर्चा में है जब TMC के बागी सांसद इस पार्टी में शामिल हो गए हैं।

NCPI के संस्थापक की प्रतिक्रिया

NCPI के संस्थापक और राष्ट्रीय संगठन सचिव शांतनु दे ने एएनआई से बात करते हुए विलय पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में सोशल मीडिया और खबरों से पता चला। मैं उनका स्वागत करता हूं कि वे मुझसे बातचीत करें। मुझे खुशी क्यों नहीं होगी अगर मेरी पार्टी बढ़ती है? मैंने सुना है कि यह फैसला पार्टी अध्यक्ष ने लिया है। उन्होंने अभी तक मुझे इस बारे में फोन नहीं किया है।" दे ने कहा कि वे पार्टी को आगे ले जाना चाहते हैं और NDA तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हैं।

विलय का राजनीतिक महत्व

एक भाजपा सांसद ने एचटी को बताया कि NCPI को इसलिए चुना गया ताकि बागी सांसदों का पश्चिम बंगाल से संबंध बना रहे और पूर्वोत्तर तक प्रतीकात्मक पहुंच हो। यह विलय दलबदल विरोधी कानून के तहत एक संवैधानिक पहेली भी खड़ी करता है, क्योंकि NCPI के पास कोई सांसद नहीं है।

FAQ

NCPI क्या है?

NCPI (Nationalist Citizens Party of India) त्रिपुरा-आधारित एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है, जिसका गठन 2022 में हुआ था। इसका कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है।

20 TMC सांसदों ने NCPI में विलय क्यों किया?

ये सांसद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद बागी हो गए थे। NCPI में विलय कर वे NDA का समर्थन कर रहे हैं, ताकि दलबदल विरोधी कानून से बच सकें।

NCPI का चुनाव चिन्ह क्या है?

NCPI का चुनाव चिन्ह 'पेन निब' (कलम की नोक) है, जो इसे चुनाव आयोग द्वारा एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी के रूप में आवंटित किया गया था।

क्या NCPI का कोई सांसद या विधायक है?

नहीं, NCPI के पास वर्तमान में कोई सांसद या विधायक नहीं है। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इसके चार उम्मीदवार NOTA से भी पीछे रहे थे।

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