जोरहाट विमान दुर्घटना: दो बिहारी जवानों की शहादत
असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना का AN-32 कार्गो विमान शनिवार को लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में बिहार के जहानाबाद जिले के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार (25) और भोजपुर जिले के अग्निवीरवायु दानिश आलम (22) शामिल हैं। दोनों की मौत से उनके गांवों में शोक की लहर है। दुर्घटना का कारण अभी स्पष्ट नहीं है, वायुसेना जांच कर रही है।
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार: आखिरी वीडियो कॉल और परिवार का दर्द
शुभम कुमार के परिवार ने बताया कि उन्होंने शनिवार सुबह करीब 9 बजे अपनी मां से वीडियो कॉल पर बात की थी। परिवार के एक सदस्य ने कहा, 'वह खुश और सामान्य लग रहे थे। उन्होंने कहा कि वह जल्दी में हैं और बाद में बात करेंगे।' शुभम कुमार जहानाबाद के हुलासगंज इलाके के बनबरिया गांव के रहने वाले थे और किसान पप्पू शर्मा के बेटे थे। उन्होंने 2017 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से प्रशिक्षण लेने के बाद वायुसेना जॉइन की थी। इस साल नवंबर में उनकी शादी तय थी। वह अप्रैल के पहले हफ्ते में अपनी दादी के श्राद्ध में शामिल होने गांव आए थे और महज 10 दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे। उनके छोटे भाई सत्यम ने बताया कि परिवार को दुर्घटना की खबर करीब 11 बजे मिली, लेकिन उन्हें यकीन नहीं हुआ। जब शुभम के फोन पर कई बार कॉल करने पर कोई जवाब नहीं मिला और अधिकारियों ने मौत की पुष्टि की, तब परिवार को सच्चाई स्वीकार करनी पड़ी। गांव के लोग उन्हें एक विनम्र युवक के रूप में याद करते हैं जो अपनी जड़ों से जुड़े रहे और छुट्टी पर आने पर सभी का गर्मजोशी से स्वागत करते थे।
अग्निवीरवायु दानिश आलम: मां को आखिरी फोटो और सपना
भोजपुर जिले के कायमनगर गांव में दानिश आलम का परिवार शनिवार सुबह उनके द्वारा भेजी गई एक तस्वीर को संभाले हुए है, जिसमें वह विमान के अंदर बैठे हैं। उनकी मां अख्तरी बेगम ने बताया, 'उन्होंने शुक्रवार शाम हमसे वीडियो कॉल पर बात की थी और बहुत खुश लग रहे थे। शनिवार सुबह उन्होंने हमें विमान में बैठे हुए अपनी फोटो भेजी। हम बाद में आरा बाजार गए थे, तभी दुर्घटना की खबर मिली। हम तुरंत घर लौट आए।' खबर सुनकर अख्तरी बेगम बेहोश हो गईं, जबकि उनके पिता मोहम्मद फारूक आलम, जो गिद्धा औद्योगिक क्षेत्र में काम करते हैं, स्तब्ध रह गए। दानिश इकलौते बेटे थे और उनकी दो बहनें हैं। मां ने कहा, 'वायुसेना में सेवा करना उनका सपना था। उन्होंने खुद पढ़ाई की योजना बनाई और उस लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत की।' दोस्त और स्थानीय लोग उन्हें एक दृढ़ निश्चयी युवक बताते हैं जो परिवार की उम्मीदें लिए हुए थे। उनके दोस्त सुजीत तिवारी ने परिवार के लिए आर्थिक मदद की अपील की। तिवारी ने कहा, 'दानिश परिवार का सबसे बड़ा सहारा था। उनकी बड़ी बहन की शादी अभी बाकी है, मां बीमार रहती हैं, और परिवार की आमदनी सीमित है। पिता प्राइवेट नौकरी में महीने के करीब 10,000 रुपये कमाते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार उनकी मदद करे।'
शवों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ लाया गया
दुर्घटना की खबर मिलने के बाद दोनों गांवों में शोक का माहौल है, लेकिन स्थानीय लोगों को इन युवाओं की वर्दी में सेवा पर गर्व भी है। रविवार को दोनों जवानों के पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाए गए, जहां उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शुभम कुमार को श्रद्धांजलि देने के लिए आसपास के गांवों से भारी भीड़ उमड़ी। वहीं, दानिश आलम के गांव में हजारों लोगों ने 'शहीद अमर रहे' के नारे लगाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जोरहाट विमान दुर्घटना में कितने लोग मारे गए?
दुर्घटना में पांच लोगों की मौत हुई, जिनमें दो बिहार के जवान शामिल हैं।
दुर्घटना का कारण क्या है?
दुर्घटना का सटीक कारण अभी पता नहीं चला है; वायुसेना जांच कर रही है।
मृतकों के परिवारों को क्या सहायता मिली?
शवों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके गांव लाया गया, और परिवारों ने सरकार से आर्थिक मदद की अपील की है।
Source: www.hindustantimes.com