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माइक्रोबियल कंसोर्टिया से धान की पैदावार में 35% की वृद्धि, किसानों को मिली राहत

मुख्य तथ्य तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के चिदंबरम में एक किसान ने माइक्रोबियल कंसोर्टिया (सूक्ष्मजीव समूह) के उपयोग से धान की पैदावार में 35% की वृद्धि हासिल की है। इस तकनीक ने रासायनिक उर्वरकों के…

मुख्य तथ्य

तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के चिदंबरम में एक किसान ने माइक्रोबियल कंसोर्टिया (सूक्ष्मजीव समूह) के उपयोग से धान की पैदावार में 35% की वृद्धि हासिल की है। इस तकनीक ने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को आधा कर दिया, जिससे लागत में भी कमी आई।

विस्तार से जानकारी

45 वर्षीय किसान एस. पार्थिबन पिछले दो वर्षों से रासायनिक उर्वरकों के बावजूद धान की स्थिर पैदावार से निराश थे। 2025 में, चिदंबरम एरिया प्रोग्रेसिव फार्मर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में उन्हें माइक्रोबियल कंसोर्टिया के बारे में पता चला। अधिकांश किसानों ने संकोच किया, लेकिन पार्थिबन ने अपने चार एकड़ के खेत में इसका परीक्षण किया।

उन्होंने देशी किस्म ADT-46 पर इसका उपयोग किया और जनवरी 2025 में पहली फसल में ही उल्लेखनीय परिणाम मिले। पार्थिबन ने बताया, "प्रति एकड़ 38 बोरी (प्रत्येक 60 किग्रा) उपज हुई, जो सामान्य 28 बोरी से 10 बोरी अधिक है। मैंने केवल 50% रासायनिक उर्वरक का उपयोग किया, जिससे पैसे की बचत हुई।"

वैज्ञानिक पृष्ठभूमि

सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक (बागवानी) एस. राजा मोहम्मद के अनुसार, इस अद्वितीय पेटेंटेड माइक्रोबियल कंसोर्टिया स्ट्रेन को तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) में वैज्ञानिक रूप से परीक्षित किया गया है। यह मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाता है, मिट्टी के स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करता है, एंजाइम गतिविधि में सुधार करता है और लाभकारी सूक्ष्मजीवी गतिविधियों को बढ़ावा देता है।

उन्होंने कहा कि मिट्टी के स्वास्थ्य को संरक्षित करने और चावल तथा अन्य खाद्य फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नवीन जैव-कृषि इनपुट को अपनाना आवश्यक है।

प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं

यह तकनीक न केवल पैदावार बढ़ाती है बल्कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके किसानों की आर्थिक बोझ भी हल्का करती है। यदि व्यापक रूप से अपनाया जाए, तो यह टिकाऊ कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माइक्रोबियल कंसोर्टिया क्या है?

यह लाभकारी बैक्टीरिया और फंगस का संतुलित मिश्रण है जो मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारता है और फसल की पैदावार बढ़ाता है।

क्या यह तकनीक सुरक्षित है?

हाँ, इस स्ट्रेन को तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) में वैज्ञानिक रूप से परीक्षित और मान्य किया गया है।

क्या इससे रासायनिक उर्वरकों की बचत होती है?

हाँ, किसान पार्थिबन ने केवल 50% रासायनिक उर्वरक का उपयोग किया, जिससे लागत में कमी आई।

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