मुख्य तथ्य
तेलंगाना के सरकारी स्कूलों में आज से नाश्ता योजना शुरू हो गई है। गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर लाखों छात्रों को पौष्टिक नाश्ता और दूध मिलेगा। इस वर्ष स्कूल खुलने में देरी हुई थी क्योंकि राज्य में भीषण गर्मी की लहर थी।
योजना का विस्तार
पहले चरण में 1,302 शैक्षणिक संस्थानों (1,269 स्कूल और 33 सरकारी जूनियर कॉलेज) में 1.44 लाख छात्रों को सप्ताह में छह दिन नाश्ता दिया जाएगा। योजना को धीरे-धीरे सभी सरकारी स्कूलों और जूनियर कॉलेजों तक बढ़ाया जाएगा। केंद्रीकृत रसोई के माध्यम से भोजन वितरित किया जाएगा।
कार्यान्वयन भागीदार
दो स्वयंसेवी संगठन — हरे कृष्णा मूवमेंट चैरिटेबल ट्रस्ट और मन्ना ट्रस्ट — पहले चरण में आठ जिलों में योजना लागू करेंगे।
- हरे कृष्णा मूवमेंट चैरिटेबल ट्रस्ट: छह जिलों के 1,162 स्कूलों में 1.03 लाख छात्रों को नाश्ता देगा। साथ ही चार जिलों के 21 जूनियर कॉलेजों में 10,000 छात्रों को भी नाश्ता मिलेगा।
- मन्ना ट्रस्ट: हैदराबाद और मेडचल-मल्काजगिरि जिलों के 107 स्कूलों में 26,000 से अधिक छात्रों को नाश्ता परोसेगा। इन्हीं दो जिलों के 12 जूनियर कॉलेजों में 4,000 छात्र भी लाभान्वित होंगे।
जूनियर कॉलेजों को शामिल करना
पहली बार जूनियर कॉलेजों को भोजन योजना में शामिल किया गया है। तेलंगाना में 430 सरकारी जूनियर कॉलेज हैं जिनमें लगभग 1.7 लाख छात्र पढ़ते हैं।
लाभार्थी और बजट
अंततः इस योजना से लगभग 22 लाख छात्र लाभान्वित होंगे। सरकार ने सालाना 720 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं — नाश्ते के लिए 540 करोड़, दूध वितरण के लिए 180 करोड़। इंटरमीडिएट छात्रों के लिए अतिरिक्त 56 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
मेन्यू
पोषण योजना के तहत छात्रों को सप्ताह में तीन दिन दूध और तीन दिन रागी जावा (रागी का पेय) दिया जाएगा। मेन्यू में डोसा, बाजरे की इडली, पूरी, बोंडा और उपमा चटनी या सांभर के साथ शामिल होंगे।
FAQ
Telangana में सरकारी स्कूलों की नाश्ता योजना कब शुरू हुई?
यह योजना आज (गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने के दिन) से शुरू हुई है।
पहले चरण में कितने छात्रों को लाभ मिलेगा?
पहले चरण में 1.44 लाख छात्रों को पौष्टिक नाश्ता और दूध उपलब्ध कराया जाएगा।
नाश्ता योजना का संचालन कौन करेगा?
हरे कृष्णा मूवमेंट चैरिटेबल ट्रस्ट और मन्ना ट्रस्ट दो स्वयंसेवी संगठन पहले चरण में आठ जिलों में योजना लागू करेंगे।
इस योजना पर सरकार का वार्षिक खर्च कितना है?
सरकार ने इस योजना के लिए सालाना 720 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें नाश्ते के लिए 540 करोड़ और दूध वितरण के लिए 180 करोड़ शामिल हैं।