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बैंक के मुख्य प्रबंधक से ₹17.9 लाख की धोखाधड़ी, कंपनी निदेशक बनकर ठगी

प्रमुख तथ्य बेंगलुरु के विल्सन गार्डन स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक शाखा के मुख्य प्रबंधक से ₹17.9 लाख की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने एक निजी कंपनी के निदेशक बनकर वॉट्सऐप कॉल की…

प्रमुख तथ्य

बेंगलुरु के विल्सन गार्डन स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक शाखा के मुख्य प्रबंधक से ₹17.9 लाख की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने एक निजी कंपनी के निदेशक बनकर वॉट्सऐप कॉल की और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक कर्मचारियों को गुमराह कर फंड ट्रांसफर करा लिया।

धोखाधड़ी का तरीका

मुख्य प्रबंधक की शिकायत के अनुसार, 9 जून को उन्हें एक वॉट्सऐप वॉयस कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को राजेश चंद्र जयशंकर बताया और दावा किया कि वह बेंगलुरु की एक निजी कंपनी के निदेशक हैं, जिसका बैंक में खाता है। उसने शाखा में ₹2 से ₹3 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट करने की इच्छा जताई। अगले दो दिनों तक वह वॉट्सऐप पर बैंक अधिकारियों से संपर्क में रहा।

10 जून को आरोपी ने कंपनी की ओर से तत्काल फंड ट्रांसफर का निर्देश दिया, जिसमें व्यावसायिक आवश्यकताओं का हवाला दिया गया। उसने बैंक से अनुरोध किया कि शाखा में उसके प्रस्तावित दौरे से पहले लेन-देन पूरा कर लिया जाए। निर्देशों के साथ ऐसे दस्तावेज भी भेजे गए जो बैंक के रिकॉर्ड से मेल खाते थे, जिससे वे प्रामाणिक लगे।

बैंक कर्मचारियों ने निर्देशों को सही मानते हुए कंपनी के खाते से दो ट्रांजेक्शन किए—एक ₹9.40 लाख और दूसरा ₹8.50 लाख—अलग-अलग बैंक खातों में।

धोखाधड़ी का खुलासा

12 जून को कंपनी के वित्त प्रबंधक ने शाखा आकर बताया कि न तो कंपनी और न ही उसके निदेशकों ने ऐसे किसी ट्रांजेक्शन को अधिकृत किया है। तब बैंक कर्मचारियों को एहसास हुआ कि वे एक प्रतिरूपण घोटाले का शिकार हो गए हैं। आरोपी के मोबाइल नंबर को कॉल करने पर वह बंद मिला।

बैंक ने तुरंत लाभार्थी बैंकों को सूचित किया और रिसीवर खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू की। जांचकर्ताओं ने कुछ खातों को फ्रीज कर दिया और धनराशि का कुछ हिस्सा ट्रेस कर लिया, लेकिन एक खाते से ₹5 लाख पहले ही दूसरे खाते में ट्रांसफर हो चुके थे।

कानूनी कार्रवाई

पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने मोबाइल फोन, वॉट्सऐप संदेश, फर्जी दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का इस्तेमाल कर कंपनी निदेशक का रूप धारण किया और बैंक कर्मचारियों को धोखा दिया। प्रारंभिक जांच में काशिम अंसारी, सबा अफताब बगदादी और मोहम्मद जुबैर को संदिग्धों के रूप में पहचाना गया है।

विल्सन गार्डन पुलिस स्टेशन में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(D) और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 319(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। शेष धनराशि का पता लगाने और अन्य आरोपियों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है।

पाठकों के लिए सावधानी

यह घटना बताती है कि कैसे साइबर अपराधी बैंकिंग प्रणाली को निशाना बना रहे हैं। बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों को किसी भी अनधिकृत संचार या फंड ट्रांसफर के अनुरोध पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की पुष्टि संबंधित संस्था से करना आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह धोखाधड़ी कैसे हुई?

आरोपियों ने एक कंपनी के निदेशक बनकर बैंक के मुख्य प्रबंधक को वॉट्सऐप कॉल किया और फिक्स्ड डिपॉजिट करने की बात कही। बाद में उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के साथ फंड ट्रांसफर का निर्देश दिया, जिससे बैंक कर्मचारियों ने ₹17.9 लाख ट्रांसफर कर दिए।

पीड़ित कौन है?

पीड़ित बेंगलुरु के विल्सन गार्डन स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक शाखा के मुख्य प्रबंधक हैं।

कितनी राशि ठगी गई?

कुल ₹17.9 लाख की ठगी हुई, जिसमें दो ट्रांजेक्शन के जरिए ₹9.40 लाख और ₹8.50 लाख अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए।

क्या आरोपियों की पहचान हुई है?

हां, पुलिस ने काशिम अंसारी, सबा अफताब बगदादी और मोहम्मद जुबैर को संदिग्धों के रूप में पहचाना है। मामले की जांच जारी है।

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