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केरल में अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस के मामलों में चिंताजनक वृद्धि, 2026 में अब तक 133 मामले और 33 मौतें

केरल में अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस का बढ़ता प्रकोप केरल में अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (Amoebic Meningoencephalitis) के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। 2016 में पहला मामला सामने आने के बाद, 2026 के पहले पांच महीनों में…

केरल में अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस का बढ़ता प्रकोप

केरल में अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (Amoebic Meningoencephalitis) के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। 2016 में पहला मामला सामने आने के बाद, 2026 के पहले पांच महीनों में ही राज्य में 133 पॉजिटिव मामले और 33 मौतें दर्ज की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अधिकांश मामले ग्रैनुलोमेटस अमीबिक एन्सेफलाइटिस (GAE) के हैं, जो दूषित पानी में पाए जाने वाले अकांथामीबा नामक मुक्त-जीवित अमीबा के कारण होता है।

पिछले वर्षों के आंकड़े

2016 से 2023 के बीच केरल में केवल 8 मामले दर्ज हुए थे। लेकिन 2024 में यह संख्या बढ़कर 36 पॉजिटिव मामलों और 9 मौतों तक पहुंच गई। 2025 में यह आंकड़ा और भी भयावह हो गया, जब 201 मामले और 47 मौतें सामने आईं। 2026 में अब तक (12 जून तक) 133 मामले और 33 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर भी असामान्य है, क्योंकि 1965 से 2018 के बीच दुनिया भर में केवल 381 मामले ही रिपोर्ट हुए थे।

मामलों में वृद्धि के कारण

केरल की स्वास्थ्य सेवाओं की निदेशक डॉ. के.जे. रीना ने बताया कि मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण राज्य में सभी अज्ञात एन्सेफलाइटिस मामलों की कड़ी जांच है। उन्होंने कहा, "हम सभी अज्ञात एन्सेफलाइटिस मामलों की जांच कर रहे हैं, जिससे पहले अनदेखे मामले अब पकड़ में आ रहे हैं।" डॉ. रीना ने यह भी बताया कि पहले अधिकांश मामले प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) के होते थे, जो नेगलेरिया फाउलेरी के कारण होता है। अब PAM के मामले कम हो गए हैं और GAE के मामले बढ़ रहे हैं।

पानी की गुणवत्ता और अन्य कारक

डॉ. रीना ने कहा कि केरल की उष्णकटिबंधीय जलवायु और खराब पानी की गुणवत्ता अकांथामीबा के प्रसार में सहायक हैं। उन्होंने कहा, "हमारे जल निकायों में वनस्पति है, जो अकांथामीबा के लिए अनुकूल है। अधिकांश प्रभावित लोग बुजुर्ग हैं या जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है।" एस्टर मिम्स (उत्तर केरल) के क्रिटिकल केयर निदेशक डॉ. अनूप कुमार ए.एस. ने भी कड़ी जांच को मामलों में वृद्धि का कारण बताया। उन्होंने कहा, "पश्चिमी चिकित्सा साहित्य में अधिकांश PAM मामले पोस्टमार्टम में ही पकड़ में आते हैं, जबकि केरल में हम जीवित रोगियों का निदान कर रहे हैं और जान बचा रहे हैं।"

उपचार और रोकथाम के प्रयास

2024 में केरल स्वास्थ्य विभाग ने अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस के प्रबंधन के लिए एक विशेष उपचार प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की, जो भारत में अपनी तरह का पहला कदम था। इससे शीघ्र निदान और मृत्यु दर में कमी आई है। 2024 में केरल में एक 14 वर्षीय बच्चा इस घातक संक्रमण से बचने वाला भारत का पहला और दुनिया का 11वां मरीज बना।

पानी की गुणवत्ता पर चिंता

केरल में कुएं के पानी की गुणवत्ता पर कई अध्ययनों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की उच्च उपस्थिति पाई गई है, जो मल संदूषण का संकेत है। 2018 में तिरुवनंतपुरम जिले में एक अध्ययन में पाया गया कि 73% नमूने कोलीफॉर्म बैक्टीरिया से दूषित थे। 2023 में एर्नाकुलम जिले में भी इसी तरह के परिणाम मिले। भारतीय विज्ञान संस्थान के 2010 के एक अध्ययन में भी केरल के पानी के नमूनों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की अधिकता पाई गई थी।

FAQ

अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस क्या है?

यह एक दुर्लभ लेकिन घातक मस्तिष्क संक्रमण है, जो मुक्त-जीवित अमीबा जैसे नेगलेरिया फाउलेरी (PAM) या अकांथामीबा (GAE) के कारण होता है। यह आमतौर पर दूषित पानी के संपर्क में आने से फैलता है।

केरल में मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कड़ी जांच और निदान के कारण अज्ञात एन्सेफलाइटिस के मामले अब पकड़ में आ रहे हैं। इसके अलावा, खराब पानी की गुणवत्ता और उच्च जनसंख्या घनत्व भी कारक हैं।

क्या यह संक्रमण जानलेवा है?

PAM की वैश्विक मृत्यु दर 97% है, जबकि GAE में जीवित रहने की संभावना अधिक है। केरल में समय पर निदान और उपचार से मृत्यु दर कम हुई है।

बचाव के क्या उपाय हैं?

स्वच्छ पानी का उपयोग करें, तालाबों या नहरों में न नहाएं, और पानी की टंकियों को नियमित रूप से साफ करें। संदिग्ध लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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