मुख्य तथ्य
अर्थशास्त्री आर. रामकुमार ने शनिवार (13 जून, 2026) को केरल में ईएमएस मेमोरियल स्टडी एंड रिसर्च सेंटर द्वारा आयोजित ईएमएस स्मारक व्याख्यान में कहा कि वामपंथ को केरल समाज में नव-उदारवादी युग में हुए बदलावों का गहन अध्ययन करना चाहिए।
विस्तार से जानकारी
रामकुमार ने कहा, "नव-उदारवाद नए वातावरण बनाता है। केरल समाज में हाल के बदलाव उल्लेखनीय हैं। केरल की वर्ग संरचना पर एक गंभीर अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है।" उन्होंने बताया कि नव-उदारवाद के तहत मध्यम वर्ग एक नए रूप में उभरा है।
"इस उच्च मध्यम वर्ग के हिस्से के रूप में धनी व्यक्तियों का एक नया वर्ग उभरा है, जिसमें नए शैक्षणिक संस्थानों, बड़े निजी अस्पतालों, पर्यटन उद्यमों और निर्माण फर्मों के मालिक शामिल हैं," उन्होंने एक विज्ञप्ति में कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि संगठित श्रमिकों के स्थान पर विभिन्न प्लेटफार्मों पर बिखरे असंगठित श्रमिकों की संख्या दस गुना बढ़ गई है।
प्रभाव और महत्व
यह व्याख्यान केरल में बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। रामकुमार का आह्वान वामपंथी दलों और शोधकर्ताओं के लिए एक दिशा-निर्देश है कि वे नव-उदारवाद के प्रभावों का गहराई से विश्लेषण करें।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- केरल में नव-उदारवादी नीतियों ने सामाजिक वर्ग संरचना को बदल दिया है।
- एक नया धनी मध्यम वर्ग उभरा है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और निर्माण क्षेत्रों में सक्रिय है।
- असंगठित श्रमिकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो श्रम बाजार में बदलाव का संकेत है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आर. रामकुमार ने केरल समाज में किस बदलाव पर जोर दिया?
उन्होंने कहा कि नव-उदारवादी युग में केरल में एक नया मध्यम वर्ग उभरा है, जिसमें शिक्षण संस्थानों, बड़े निजी अस्पतालों, पर्यटन उद्यमों और निर्माण फर्मों के मालिक शामिल हैं। साथ ही, संगठित श्रमिकों की जगह असंगठित श्रमिकों की संख्या दस गुना बढ़ गई है।
ईएमएस स्मारक व्याख्यान का आयोजन किसने किया?
इस व्याख्यान का आयोजन ईएमएस मेमोरियल स्टडी एंड रिसर्च सेंटर ने किया था।
वामपंथ को केरल के बारे में क्या करना चाहिए?
रामकुमार के अनुसार, वामपंथ को केरल समाज में नव-उदारवादी युग में हुए बदलावों का गहन अध्ययन करना चाहिए।
स्रोत: www.thehindu.com