Desh Duniya | गवरी देवी

राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी का 98 वर्ष की आयु में निधन

प्रमुख तथ्य राजस्थान की प्रसिद्ध मांड लोक गायिका गवरी देवी का गुरुवार शाम (13 जून 2026) पाली जिले के गवरी नगर, देसूरी स्थित उनके पैतृक आवास पर निधन हो गया। वह 98 वर्ष की थीं…

प्रमुख तथ्य

राजस्थान की प्रसिद्ध मांड लोक गायिका गवरी देवी का गुरुवार शाम (13 जून 2026) पाली जिले के गवरी नगर, देसूरी स्थित उनके पैतृक आवास पर निधन हो गया। वह 98 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके निधन से राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

विस्तार से जानकारी

गवरी देवी ने लगभग आठ दशकों तक मांड गायन को समर्पित रहकर राजस्थान की लोक संगीत परंपरा को देश-विदेश में पहचान दिलाई। उनका जन्म जैसलमेर क्षेत्र में हुआ था, जहाँ मांड शैली का उदय हुआ और यह कभी राजदरबारों से जुड़ी थी। उनकी प्रसिद्ध प्रस्तुति 'केसरिया बालम' राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान बन गई।

प्रमुख गीत और योगदान

  • मोर बोले रे मालजी
  • बागा चलो केसरिया
  • 100 कोसों दूर बसे मारा साजन
  • ढोला मारे देस में निपजे तीन रत्ना

उन्होंने दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो से जुड़कर अपनी कला का प्रसार किया। राजस्थान सरकार ने उन्हें वीर दुर्गादास राठौर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया।

प्रभाव और श्रद्धांजलि

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा, "पाली की प्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी के निधन की खबर अत्यंत दुखद है। उनका जाना लोक संगीत जगत और राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।" पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा, "गवरी देवी ने दशकों तक मांड गायन किया और इस लोक कला का पर्याय बन गईं। उनका निधन राजस्थान की कला और संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति है।"

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

गवरी देवी का योगदान न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत की लोक संगीत विरासत में अमूल्य है। उनकी मांड शैली को संरक्षित करने के प्रयास जारी रहने चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गवरी देवी कौन थीं?

गवरी देवी राजस्थान की प्रसिद्ध मांड लोक गायिका थीं, जिन्होंने आठ दशकों से अधिक समय तक पारंपरिक संगीत को संरक्षित किया।

गवरी देवी का निधन कब और कहाँ हुआ?

उनका निधन 13 जून 2026 की शाम पाली जिले के गवरी नगर, देसूरी स्थित उनके पैतृक आवास पर हुआ।

गवरी देवी की प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?

उनके लोकप्रिय गीतों में 'मोर बोले रे मालजी', 'बागा चलो केसरिया', '100 कोसों दूर बसे मारा साजन' और 'ढोला मारे देस में निपजे तीन रत्ना' शामिल हैं।

गवरी देवी को कौन से पुरस्कार मिले?

उन्हें राजस्थान सरकार द्वारा वीर दुर्गादास राठौर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

स्रोत: www.hindustantimes.com

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