मानसून की धीमी शुरुआत
तेलंगाना और हैदराबाद में लंबी और भीषण गर्मी के बाद मानसून ने दस्तक दे दी है, लेकिन इसकी शुरुआत कमजोर रही है और आने वाले हफ्तों में भी इसके कमजोर बने रहने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि कभी-कभी भारी बारिश के झोंके आ सकते हैं, लेकिन अधिकांश बारिश हल्की से मध्यम स्तर की होगी।
विशेषज्ञों की राय
तेलंगाना विकास योजना सोसायटी (TGDPS) के वरिष्ठ मौसम सलाहकार वाई.वी. रामा राव ने बताया, 'मानसून अब तक मजबूत होने के संकेत नहीं दे रहा है। पूरे क्षेत्र में व्यापक बारिश की संभावना कम है। बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में कम दबाव के क्षेत्र बनने के कोई संकेत नहीं हैं, जो आमतौर पर इस समय अधिक बारिश लाते हैं।'
गर्मी का प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में लोग जल्दी मानसून के आदी हो गए थे, लेकिन इस बार देरी ने गर्मी को और बढ़ा दिया। जून के दूसरे सप्ताह तक तापमान सामान्य से 2-5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। कई इलाकों में दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया, जबकि हैदराबाद में 38-40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। रात का तापमान भी 22-28 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा।
उत्तरी हवाओं का प्रभाव
रामा राव ने कहा, 'उत्तरी हवाओं का बने रहना अभी भी मध्य भारत से गर्म हवाएं ला रहा है, जहां तापमान अधिक है। हालांकि मानसून भद्राद्रि कोठागुडेम तक पहुंच गया है, लेकिन यहां स्थितियां कमजोर बनी हुई हैं। केरल में सामान्य बारिश हुई है, लेकिन पूर्वोत्तर में अधिक व्यापक बारिश देखी गई।'
तापमान में गिरावट की उम्मीद
हालांकि, बादलों की बढ़ती आवृत्ति और मानसून के धीरे-धीरे फैलने से आने वाले दिनों में तापमान में कुछ डिग्री की गिरावट आ सकती है। लेकिन बड़े जलवायु कारक इस मौसम को प्रभावित कर सकते हैं। चल रहा एल नीनो — जो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय भाग के गर्म होने की विशेषता है — मानसून की गतिविधियों को कमजोर कर सकता है। हालांकि, अगर हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) सकारात्मक होता है या मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) अपने गीले चरण में प्रवेश करता है, तो बारिश बढ़ सकती है।
एल नीनो का प्रभाव
भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) के वरिष्ठ वैज्ञानिक पी.ए. फ्रांसिस के अनुसार, प्रशांत महासागर में एल नीनो की स्थिति काफी मजबूत हो गई है, जिसकी संभावना 90% तक पहुंच गई है, और यह फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। मई में देखे गए समुद्री सतह के तापमान में असामान्यताओं ने एल नीनो की शुरुआत की पुष्टि की है, जिसकी संभावना 70-90% है। ENSO-तटस्थ स्थितियां 10-30% की द्वितीयक संभावना बनी हुई हैं, जबकि ला नीना की संभावना बहुत कम है।
एल नीनो उत्तरी हिंद महासागर में लंबे समय तक समुद्री हीटवेव से भी जुड़ा है, जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित कर सकता है, प्रवाल भित्तियों को नुकसान पहुंचा सकता है और मत्स्य पालन को प्रभावित कर सकता है — जो पहले से ही कमजोर मानसून की संभावनाओं में चिंता का एक और कारण जोड़ता है।
FAQ
Telangana में मानसून कब तक कमजोर रहेगा?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कुछ हफ्तों तक मानसून कमजोर बना रहेगा और भारी बारिश की संभावना नहीं है।
El Nino का Telangana के मानसून पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
El Nino के कारण मानसून की गतिविधियां कमजोर हो सकती हैं, हालांकि अगर Indian Ocean Dipole सकारात्मक होता है या MJO गीले चरण में प्रवेश करता है तो बारिश बढ़ सकती है।
क्या Telangana में तापमान में गिरावट आएगी?
हां, बादलों की बढ़ती आवृत्ति और मानसून के धीरे-धीरे फैलने से आने वाले दिनों में तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है।