प्रमुख तथ्य
चेन्नई के कोडुंगैयूर डंप यार्ड में स्थित कचरा-से-ऊर्जा (WtE) भस्मक संयंत्र के आसपास रहने वाले 79.8% निवासियों ने स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं की सूचना दी है। यह खुलासा एक सामुदायिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण में हुआ है, जो 16 और 17 फरवरी को आयोजित किया गया था।
सर्वेक्षण का विवरण
फेडरेशन ऑफ नॉर्थ चेन्नई रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन और अलायंस फॉर इन्सिनरेटर फ्री चेन्नई ने गुरुवार को ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (GCC) आयुक्त जी.एस. समीरन को एक याचिका सौंपी, जिसमें भस्मक संयंत्र को स्थायी रूप से बंद करने की मांग की गई।
सर्वेक्षण 50 मीट्रिक टन प्रति दिन (MTPD) क्षमता वाले संयंत्र के दो किलोमीटर के दायरे में आठ पड़ोस के 415 घरों में किया गया। इसमें गंभीर सामाजिक-आर्थिक व्यवधान दर्ज किए गए।
स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभाव
सर्वेक्षण के अनुसार, 93.4% उत्तरदाताओं ने अपनी बीमारियों का कारण संयंत्र से निकलने वाला धुआं बताया। जबकि सभी ने संयंत्र से धुआं निकलते देखा, 91.6% ने बताया कि उनका भूजल दृष्टिगत रूप से खराब या पीने योग्य नहीं है।
इसके अलावा, 53% परिवारों ने बच्चों की शिक्षा में व्यवधान की सूचना दी, और 45.5% ने बार-बार काम से अनुपस्थित रहने की बात कही। आधे से अधिक परिवारों ने स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक बोझ की सूचना दी।
निवासियों की मांगें
संघों ने अन्य प्रस्तावित भस्मक परियोजनाओं को रद्द करने की मांग दोहराई, जिनमें कोडुंगैयूर में 2,100 TPD, तांबरम में 1,500 TPD और कोयंबटूर में एक प्रस्तावित संयंत्र शामिल है।
फेडरेशन ने नागरिक निकाय से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अपने 'ग्रीन चेन्नई इनिशिएटिव' प्रस्ताव को लागू करने का अनुरोध किया। साथ ही, प्रभावित समुदायों के लिए व्यापक प्रभाव आकलन और चिकित्सा उपचार की मांग की।
पृष्ठभूमि
यह सर्वेक्षण 11 जून 2026 को GCC आयुक्त को प्रस्तुत किया गया। निवासी संघ लंबे समय से भस्मक संयंत्र के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
FAQ
सर्वेक्षण में कितने घरों को शामिल किया गया?
सर्वेक्षण 415 घरों में आयोजित किया गया, जो संयंत्र के दो किलोमीटर के दायरे में आते हैं।
निवासियों की मुख्य मांग क्या है?
निवासी संघ कोडुंगैयूर भस्मक संयंत्र को स्थायी रूप से बंद करने और अन्य प्रस्तावित भस्मक परियोजनाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
सर्वेक्षण में कौन-कौन सी स्वास्थ्य समस्याएं सामने आईं?
93.4% उत्तरदाताओं ने अपनी बीमारियों का कारण संयंत्र से निकलने वाला धुआं बताया, जबकि 91.6% ने भूजल के दूषित होने की सूचना दी।
स्रोत: www.thehindu.com