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भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 2024 में 2.5% की वृद्धि, 1.77 लाख से अधिक मौतें: MoRTH रिपोर्ट

प्रमुख तथ्य भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 2024 में 2.5% की वृद्धि हुई, जिसमें 1,77,175 लोगों की जान गई। यह आंकड़ा 2023 के 1,72,890 से अधिक है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा…

प्रमुख तथ्य

भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 2024 में 2.5% की वृद्धि हुई, जिसमें 1,77,175 लोगों की जान गई। यह आंकड़ा 2023 के 1,72,890 से अधिक है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी 'रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया 2024' रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल 4,87,707 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.5% अधिक हैं।

2024 में प्रतिदिन औसतन 485 मौतें हुईं, जबकि 2023 में यह संख्या 473 थी। प्रति घंटे मौतों की संख्या 19.7 से बढ़कर 20.2 हो गई।

शहरों में स्थिति

50 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सड़क दुर्घटनाओं में मामूली 0.4% की कमी आई। दिल्ली में सबसे अधिक 5,657 दुर्घटनाएं, 1,551 मौतें और 5,224 घायल हुए। बेंगलुरु में 4,769 दुर्घटनाएं और 894 मौतें दर्ज की गईं। चेन्नई में 3,762 दुर्घटनाएं और 542 मौतें हुईं। मुंबई में 2,604 दुर्घटनाएं और 370 मौतें दर्ज की गईं। कोलकाता में सबसे कम 1,942 दुर्घटनाएं और 191 मौतें हुईं। अहमदाबाद, धनबाद और कानपुर में मौतों में कमी आई।

हिट एंड रन और अन्य कारण

हिट एंड रन के मामलों में 9.0% की वृद्धि हुई, जिसमें 34,030 मौतें हुईं, जो कुल मौतों का 19.2% है। पीछे से टक्कर (हिट फ्रॉम बैक) में 37,404 मौतें (21.1%) हुईं, जो सबसे बड़ा कारण है। हेड-ऑन कोलिजन में 28,400 मौतें (16.0%) हुईं, जबकि साइड इम्पैक्ट में 5.3% की वृद्धि दर्ज की गई। पार्क किए गए वाहनों से टक्कर में मौतों में 20.4% की कमी आई।

व्यापक रुझान

दोपहिया वाहनों (46.2%) और पैदल चलने वालों (20.6%) की मौतें सबसे अधिक हुईं। राष्ट्रीय राजमार्ग, जो कुल सड़क नेटवर्क का केवल 2.1% हैं, में 36.6% मौतें हुईं। ओवरस्पीडिंग 70.3% मौतों का कारण बनी। 18-45 आयु वर्ग में 66.1% मौतें हुईं, जबकि 18-60 आयु वर्ग में यह 83.3% है। ग्रामीण क्षेत्रों में 70.8% मौतें हुईं। दुर्घटना गंभीरता (प्रति 100 दुर्घटनाओं पर मौतें) 2023 में 36 से बढ़कर 2024 में 36.3 हो गई।

सीधी सड़कों पर सबसे अधिक 1,18,817 मौतें (67.1%) हुईं, जबकि गड्ढों से संबंधित मौतों में 10.4% की वृद्धि हुई।

विशेषज्ञों की राय

राष्ट्रीय अनुप्रयोगिक आर्थिक अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ सलाहकार एस वेलमुरुगन ने कहा, "सीधी सड़कों पर दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण ओवरस्पीडिंग है। चालक अक्सर गति सीमा पार कर जाते हैं, और पैदल यात्री क्रॉसिंग, गलत दिशा में ड्राइविंग और मीडियन खुलने जैसे कारकों के साथ मिलकर गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।"

इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन के अध्यक्ष रोहित बालूजा ने कहा, "ये आंकड़े सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं के मूल कारणों की पहचान करने में लगातार विफलता को दर्शाते हैं। वैज्ञानिक जांच और निदान के बिना हम लक्षणों का इलाज करते रहेंगे।"

सुधार और डेटा अंतर

राज्य राजमार्गों पर दुर्घटनाओं में 2.01% और मौतों में 0.41% की कमी आई। हेलमेट न पहनने से होने वाली मौतों में मामूली कमी आई (54,568 से 54,122), जबकि सीटबेल्ट न पहनने से मौतों में 9.7% की कमी आई (16,025 से 14,466)। हरियाणा (-6.3%), गुजरात (-4.7%) और आंध्र प्रदेश (-2.0%) में दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई।

तमिलनाडु में सबसे अधिक 67,526 दुर्घटनाएं (13.8%) हुईं, जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 24,118 मौतें (13.6%) हुईं। मिजोरम में दुर्घटना गंभीरता सबसे अधिक (93.2) रही।

MoRTH और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों में अंतर है। MoRTH ने 1,77,175 मौतें दर्ज कीं, जबकि NCRB ने 1,62,500 मौतें दर्ज कीं। यह अंतर वर्गीकरण पद्धति में भिन्नता के कारण है।

FAQ

2024 में भारत में कितने सड़क दुर्घटनाएं हुईं?

2024 में भारत में 4,87,707 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2023 से 1.5% अधिक हैं।

सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मौतें किस वजह से हुईं?

ओवरस्पीडिंग 70.3% मौतों का कारण बनी, जबकि पीछे से टक्कर (21.1%) और हिट एंड रन (19.2%) प्रमुख थे।

किस शहर में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुईं?

दिल्ली में सबसे अधिक 5,657 दुर्घटनाएं और 1,551 मौतें हुईं, जबकि बेंगलुरु दूसरे स्थान पर रहा।

क्या सड़क दुर्घटनाओं में कोई सुधार हुआ है?

हां, राज्य राजमार्गों पर दुर्घटनाओं में 2.01% और मौतों में 0.41% की कमी आई। हेलमेट और सीटबेल्ट न पहनने से होने वाली मौतों में भी गिरावट दर्ज की गई।

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